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Maharajganj News: बांध की मिट्टी निकालकर नारायणी तटबंध के रेनकट भर रहे जिम्मेदार

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नारायणी नदी के तटबंध पर हुआ रेनकट। 
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तहसीलदार की जांच के बाद भी नहीं सुधरे सिंचाई विभाग, नारायणी तटबंध पर रेनकट बरकरार
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जेसीबी से तटबंध की ऊपरी सतह की मिट्टी निकालकर रेनकट की कर रहे मरम्मत
महराजगंज। निचलौल क्षेत्र के ग्राम भेड़िहारी स्थित नारायणी नदी (बड़ी गंडक) के ठोकर नंबर-एक पर बने नए तटबंध की मरम्मत को लेकर सिंचाई विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग जेसीबी से तटबंध की ऊपरी सतह की मिट्टी निकालकर रेनकट भर रहा है। ऐसे में बंधे की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है। वहीं जिम्मेदारों का कहना है कि अभी तटबंध पर कोई पैसा खर्च नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को तहसीलदार अमित सिंह ने नारायणी नदी के तटबंध का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में तटबंध पर बड़े-बड़े रेनकट मिले। इससे विभाग में हड़कंप मच गया। इसके बावजूद बुधवार को विभाग ने जेसीबी से तटबंध की ऊपरी सतह पर सीमित कार्य कर खानापूर्ति कर दी, जबकि शाम तक तटबंध के दोनों ओर बने रेनकट और गड्ढे जस के तस बने रहे।
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ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने से तटबंध की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि मंगलवार की तुलना में बुधवार को नदी का बहाव कुछ कम रहा लेकिन संभावित बाढ़ को लेकर लोगों में भय बना हुआ है।
डोमा खास निवासी राममिलन ने कहा कि यहां पर हमेशा बाढ़ आती है। जिससे काफी नुकसान होता है। वहीं विनोद कुमार ने कहा कि अगर तटबंध को बचाने के लिए पहले से ही उपाय हो जाएं तो हम लोगों की परेशानी दूर हो जाएगी।
कलनही निवासी अजय राजभर और चंदा गुलभार निवासी रामकिशुन ने कहा कि बाढ़ की विभीषिका हम लोग हमेशा झेलते हैं। इसके बाद भी कोई ठोस उपाय नहीं होता है। तटबंध की ऊपरी सतह से ही मिट्टी निकालकर रेनकट भरने से तो बांध और कमजोर ही होगा।
जिम्मेदार अगर बाढ़ से पहले ही चेत जाएं तो यह समस्या ही उत्पन्न नहीं होगी। अभी तो ज्यादा बारिश भी नहीं हुई है तभी रेनकट होने लगा है। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और सिंचाई विभाग से तटबंध की समुचित मरम्मत कराए जाने की मांग की है।
करीब छह गांव होते हैं प्रभावित
नारायणी नदी में बाढ़ आने से सबसे ज्यादा फसलें प्रभावित होती हैं। बाढ़ की वजह से भेड़ियारी, डोमा, बढ़या, चंदागूलरभार, कलनही गांव की फसलें डूब जाती हैं। बाढ़ के चलते करीब 10 हजार की आबादी प्रभावित होती हैं। दिनेश मुसहर ने बताया कि बाढ़ के समय में तो हम लोगों की नींद ही उड़ जाती है। पूरी रात दिन जागकर बिताना पड़ता है।
स्पीकअप
सरकार हर वर्ष तटबंधों की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च करती है। सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
- दिनेश प्रसाद, ग्रामीण
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क्षेत्र के लोग हर साल बाढ़ की तबाही झेलते हैं लेकिन विभागीय अधिकारी केवल राहत वितरण तक ही सीमित रह जाते हैं। बाढ़ की विभिषिका हम लोगों को झेलनी पड़ती है।
- प्रदीप यादव, ग्रामीण
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तहसील प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पारदर्शिता के साथ गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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- सिद्धार्थ गुप्ता, उपजिलाधिकारी, निचलौल
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बारिश के समय में रेनकट होते रहते हैं। यह पूरी बारिश जारी रहेगा। जहां-जहां रेनकट हुआ है उसको भरा जा रहा है। अभी तक इस पर कोई पैसा नहीं खर्च किया गया है। डरने की बात नहीं है। तटबंध मजबूत है।
- राजीव कपिल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग खंड-दो, महराजगंज
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