- लंबित फाइलों को लेकर उच्चाधिकारी गंभीर, त्वरित निस्तारण का निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
महराजगंज। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय पर जांच करने के लिए दूसरे दिन भी उच्चाधिकारी पहुंचे। कार्यालय में लंबित कार्यों और अस्थाई बस स्टेशन मामले में गड़बड़झाले की पोल खुली तो एआरटीओ विनय कुमार पर गाज गिर गई। उनको मुख्यालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की विभागीय जांच की जा रही है। अचानक हुई कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
उप आयुक्त भीम सेन सिंह, गोरखपुर संभागीय परिवहन अधिकारी रामबृक्ष सोनकर और संभागीय परिवहन अधिकारी संजय कुमार झा ने शुक्रवार को एआरटीओ कार्यालय का निरीक्षण किया। उप परिवहन आयुक्त ने बताया कि निरीक्षण के दौरान एआरटीओ विनय कुमार को लखनऊ से अटैच किया गया है। उनके स्थान पर सिद्धार्थनगर के एआरटीओ सुरेश मौर्या को जिम्मेदारी दी गई है। जांच के दौरान अधिकारियों ने प्रत्येक पटल पर लंबित फाइलों के बारे में जानकारी ली। पंजीकरण, फिटनेस, ट्रांसफर समेत अन्य कार्यों की लंबित फाइलों को त्वरित निस्तारित करने के लिए निर्देश किया। बाबुओं को निर्देश दिया गया कि अपने पटल की फाइल को समय से निस्तारित करें। इसमें लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। कार्यालय में कामकाज को लेकर जितने भी आरोप लगाए गए हैं, उन सभी की जांच की जा रही है। संभागीय परिवहन अधिकारी रामबृक्ष सोनकर ने बताया कि पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, उन सभी की जांच की जा रही है। लंबित फाइलों को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को परेशान न हो, इसका विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनहित के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने का निर्देश दिया गया है।
सूत्र की मानें तो एआरटीओ कार्यालय में लंबित फाइल व अस्थाई बस स्टेशन मामले ने तूल पकड़ा तो जिम्मेदारों को कार्रवाई करनी पड़ी। मंगलवार को मामले में जांच की गई थी। इसके बाद बृहस्पतिवार को भी आरटीओ गोरखपुर और शुक्रवार को उप आयुक्त ने जांच की। कुल मिलाकर विभाग की किरकिरी होता देखकर आनन-फानन में कार्रवाई कर जिम्मेदारों ने किनारा कस लिया है। सूत्र की मानें तो गुजरे वक्त में पंजीकरण, ट्रांसफर, फिटनेस आदि की फाइल को जान-बूझकर लटका दिया गया था। प्रत्येक फाइल के एवज में रकम की मांग की जा रही थी। इस वजह से फाइल लटकी थीं। चर्चाओं पर यकीन करें तो बाबू भी परेशान थे। वह भी ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे। उनपर भी अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था। कार्रवाई होने के बाद चर्चा हो रही थी कि जिम्मेदारों ने दफ्तर को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का प्रयास किया है। आने वाले दिनों में लटके हुए काम तेजी से हो सकेंगे। उधर, अस्थाई बस स्टेशन मामले में घोटाले के आरोप पर जिम्मेदाराें ने कुछ बोलने से इन्कार कर दिया, लेकिन इस प्रकरण की जांच विभाग गोपनीय तरीके से कर रहा है। अखिरकार लंबी जद्दोजहद के बाद एआरटीओ को मुख्यालय से संबंध कर दायित्व की इतिश्री की गई।
एआरटीओ को मुख्यालय से संबद्ध कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। प्राथमिकता के आधार पर लंबित कार्यों को निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य मामलों की जांच की जा रही है। शासन की मंशा के अनुसार जनहित के कार्यों को ठीक ढंग से समयबद्ध करने के लिए जिम्मेदारों को निर्देशित किया गया है।
भीमसेन सिंह, उप आयुक्त परिवहन, वाराणसी
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