शिक्षक और कर्मचारी बोले- यह कैसी नीति जो जनप्रतिनिधियों पर लागू नहीं, सिर्फ कर्मचारी भुगत रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। एक अप्रैल 2004 से लागू हुई नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) को शिक्षक और कर्मचारी पसंद नहीं कर रहे हैं। वह इसे रद्द किए जाने की मांग पर अडिग हैं। इसे लेकर कर्मचारी और शिक्षक संगठन लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
अटेवा के पदाधिकारियों ने शहर में बैठक के दौरान बताया कि शिक्षकों-कर्मचारियों ने बैठक में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली का मुद्दा उठाया गया है। अब तक हुए आंदोलन में प्रदेश में कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। एनपीएस जनप्रतिनिधियों पर लागू नहीं है, जबरन इसे कर्मचारियों और शिक्षकों पर थोपा गया है। इसकी जगह ओपीएस लागू किया जाए।
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ओपीएस की खूबियां
- पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से कटौती नहीं।
-सुविधा के मुताबिक या अधिक जीपीएफ की सुविधा।
-सेवानिवृत्त होने पर जीपीएफ की राशि मिलना।
-जरूरत पर जीपीएफ से मदद।
-पेंशन में भत्ते के साथ एकमुश्त राशि मिलना।
-कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की सुविधा।
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एनपीएस की खामियां
वेतन से प्रतिमाह 10 फीसदी की कटौती।
मुद्रा बाजार में कर्मचारियों की राशि का निवेश।
सेवानिवृत्ति के समय राशि का महज 60 फीसदी भुगतान।
पेंशन की राशि बहुत कम होना।
कार्यकाल के दौरान वेतन से कटौती का 25 फीसदी अंश महज तीन बार ही प्रयोग कर पाना।
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एनपीएस की खामियों की वजह से कर्मचारी इसका समर्थन करने को तैयार नहीं हैं। हाल ही में दिल्ली में आयोजित रैली में युवाओं ने साफ किया कि उन्हें एनपीएस से कोई सरोकार नहीं है।
सुधीर त्रिपाठी, - मीडिया प्रभारी, अटेवा
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एनपीएस जनप्रतिनिधियों पर लागू नहीं होती। इसे कर्मचारियों पर जबरदस्ती थोपना तानाशाही है। पुरानी पेंशन बहाली के लिए शिक्षक-कर्मचारी एकजुट हैं।
टीपी सिंह, अध्यक्ष, अटेवा, महराजगंज
ओपीएस कर्मचारी के लिए बुढ़ापे की लाठी है। एनपीएस में सेवानिवृत्ति के समय हमें जो मिलेगा, वह भरण- पोषण के लिए पर्याप्त नहीं होगा। हम पुरानी पेंशन के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
राजेश जायसवाल, प्रदेश संगठन मंत्री, अटेवा
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शिक्षक और कर्मचारी ओपीएस के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हम अपने हक के लिए लगातार लड़ते रहेंगे। एनपीएस हमारे हित में नहीं है। जिम्मेदारों को भी अब यह बात समझनी चाहिए।
देवेश पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष