महराजगंज। होलाष्टक 17 मार्च से शुरू हो रहा हैं। इनका समापन होलिका दहन वाले दिन 25 मार्च को होगा। होलाष्टक से होली उत्सव के साथ होलिका दहन की तैयारियां भी शुरू हो जाएंगी। इस दौरान मांगलिक कार्य नहीं होंगे। होलाष्टक से तात्पर्य होली के आठ दिन पूर्व से है। आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत हो जाती है। इन दिनों शुभ कार्य करने की मनाही रहती है।
होलाष्टक के समय विशेष रूप से विवाह, वाहन खरीद, नया निर्माण व नया काम आरंभ नहीं करना चाहिए। अर्थात् इन दिनों में किए गए कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है। होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं। इस कारण शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता। इस दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं। इन ग्रहों के उग्र होने के कारण मनुष्यों में निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
मां पीतांबरा जनकल्याण ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषी आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी ने बताया कि होली से 8 दिन पूर्व होलाष्टक मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि हृषीकेश पंचाग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 16 मार्च को रात 2 बजकर 20 मिनट से होगा और जिसका समापन 17 मार्च को रात्रि 01 बजकर 58 मिनट पर होगा। ऐसे में होलाष्टक 17 मार्च से लगेगा और 24 मार्च को रात्रि में 10 बजकर 27 मिनट के बाद भद्रा उपरान्त होलिकादहन के साथ समाप्त होगा। 25 तारीख को काशी में होली मनाई जाएगी, इसके बाद 26 मार्च को संपूर्ण भारत में होली मनाई जाएगी।
होलाष्टक में क्या करें-
-होलाष्टक में पूजा पाठ करें।
-नित्य कर्म पूजा पाठ होलाष्टक में किया जा सकता है।
- अति आवश्यक होने पर किसी भी प्रकार का अनुष्ठान भागवत प्रवचन इत्यादि भी होलाष्टक में किया जा सकता है।
होलाष्टक में क्या न करें
- होलाष्टक में नया वाहन नहीं खरीदना चाहिए।
- होलाष्टक में गृह प्रवेश अथवा घर खरीदना व जमीन खरीदना नहीं चाहिए।
-होलाष्टक मे किसी भी नए कार्य का प्रारम्भ न करें।
-होलाष्टक में विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत इत्यादि संस्कार नहीं करना चाहिए।