महराजगंज। नेपाल में चीन की दवा कंपनियों का नेटवर्क मजबूत हो रहा है। इसका फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं। करोड़ों के इस धंधे में नकली दवाएं आसानी से खप जा रही हैं। लाइसेंसी कारोबारी चीन के बढ़ते दखल से परेशान हैं।
उनका कारोबार सिमट रहा है। हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड से आने वाली नकली दवाओं पर यूपी में सख्ती बढ़ी तो धंधेबाजों ने पश्चिम बंगाल का रुख कर लिया है। बांग्लादेश बॉर्डर पर कैंसर की नकली दवा की खेप पकड़े जाने से जांच एजेंसियों में खलबली मची है।
सूत्रों की माने तो नकली दवाओं और चीन में बने चिकित्सा उपकरणों को पगडंडियों से नेपाल भेजा जा रहा है। हर महीने करोड़ाें का धंधा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग भी इसे लेकर सतर्कता बरत रहा है। खुफिया सूत्रों के इनपुट के अनुसार, पहले नेपाल के मैदानी क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र से दवाएं भेजी जाती थीं, लेकिन वहां चीन के बढ़ते प्रभाव के बाद भारत से आने वाली दवाओं की रोकटोक होने लगी। इससे भारतीय क्षेत्र के बड़े व्यापारियों ने कारोबार घटाना शुरू कर दिया। कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों की दवा नेपाल भेजी जाती थी। इन दवाओं की जगह अब चीन की कंपनियों ने अपना नेटवर्क बना लिया है।
शहर के दवा कारोबारी बताते हैं कि कैंसर की दवाओं की बात करें तो एक करोड़ का कारोबार होता है। ये दवाएं नेपाल के अस्पतालों में जाती थीं, लेकिन नेपाल में भारतीय कंपनियों की दवाइयों की मांग अब कम होने लगी है। इसकी वजह यह है कि वहां अवैध रूप से दवाएं पहुंच रही हैं।
दवाएं धंधेबाज हर महीने नेपाल भेज रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में अक्सर दवाएं पकड़ी जाती हैं। इस पूरे सिंडिकेट में कैरियर ही पकड़े जाते हैं। मुख्य सरगना पर कम ही कार्रवाई होती है। सूत्रों का दावा है कि गहन जांच होने पर बड़ा मामला उजागर हो सकता है। त