महराजगंज। निजी अस्पतालों में इलाज की लचर व्यवस्था का खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं। मोटी रकम खर्च करने के बाद भी मरीज की जान बचेगी, इसकी गारंटी नहीं है। मामला सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग आनन-फानन में कार्रवाई तो करता है, लेकिन इस पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
फरेंदा जिस निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत हुई है, इसके पहले भी एक मौत हो चुकी है। फरेंदा कस्बे में एक निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद से अस्पताल बंद है। संचालक का पता नहीं चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनी जांच कमेटी ने अभी सीएमओ को रिपोर्ट नहीं सौंपी है। सूत्रों की माने तो मृतका के परिजनों से अस्पताल संचालक से समझौता करने की योजना बना रहे हैं।
दोनों पक्षों की ओर से बातचीत चल रही है। कुछ ले देकर मामले को रफादफा करने की कोशिश की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि आठ माह पहले भी इसी अस्पताल में धानी ढाला निवासी संजय चौरसिया की ऑपरेशन के बाद मौत हो गई थी। उस दौरान परिजनों ने अस्पताल कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया था।
क्षेत्र के सम्मानित लोगों की मौजूदगी में मामले को शांत कराया गया था। अस्पताल काफी दिनों से सुर्खियों में रहा है। यहां पर आए दिन घटनाएं हो रही हैं। विभागीय अधिकारी मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। फरेंदा के अलावा ठूठीबारी, निचलौल, पनियरा, परतावल में भी निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान गुजरे वक्त में मौते हुई थीं। हर बार हंगामे के बाद मामले को रफादफा करा दिया जाता है। मामला मैनेज नहीं होने पर केस दर्ज होता है।
पनियरा क्षेत्र के रजौड़ा खुर्द निवासी महिला आयशा खातून ने बताया कि पति नसरुद्दीन अंसारी (55) को सर्दी जुखाम, बुखार हो गया था। बीते 25 अक्तूबर को पति का इलाज कराने के लिए नगर पंचायत पनियरा में स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां डाक्टरों ने उन्हें भर्ती किया और एक कागजात पर हस्ताक्षर करवाकर इलाज करना शुरू कर दिया।
इलाज के दौरान नर्सिंग होम का संचालक ने इलाज का खर्च बताकर हमसे काउंटर पर 24 हजार रुपये एडवांस जमा कराया गया था। डॉक्टरों की ओर से पति के इलाज करने में लापरवाही की जा रही थी। इसी दौरान 28 अक्तूबर को सुबह में पति की तबीयत बिगड़ने लगी। उस समय डाक्टरों ने बिना उसे बताए पति को अस्पताल से बाहर निकाल दिया। जब इसका कारण पूछा कि तो डॉक्टर ने कहा कि इन्हें इलाज के लिए गोरखपुर में लेकर जाओ। इनका इलाज यहां पर नहीं हो पाएगा। पति का इलाज कराने को लेकर आनन-फानन में निजी साधन से गोरखपुर में एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया। जहां पर इलाज के दौरान पति का मौत हो गई थी।