महराजगंज। आसमान के साफ रहने पर रात में दक्षिण की तरफ दिखने वाला सर्वाधिक चमकदार अगस्त्य तारा 22 मई को डूब जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि इसके बाद धरती पर तपिश और तेज हो जाएगी।
इसके अस्त होने के बाद 25 मई से नौतपा प्रभावी होगा जो 2 जून तक बना रहेगा। अगस्त्य तारा दोबारा सितंबर में उदित होगा। ग्रह नक्षत्रों व ज्योतिष के जानकार पं. विंध्यवासिनी पांडेय के अनुसार अगस्त्य तारा इस बार 22 मई को अस्त हो रहा है। इसके अस्त होने के बाद दक्षिणी भारत के समुद्रीय क्षेत्रों से वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज होगी।
खगोल शास्त्र के अनुसार सूर्य और अगस्त्य तारा के संबंधों से बादल व बारिश के लिए तैयार होते हैं। इसके अस्त होने एवं सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने पर नौतपा का प्रभाव शुरू होगा। अगस्त्य तारा उदित होने पर चौमासे की बारिश थम जाती है।
सनातन धर्म के मुताबिक अगस्त्य तारा का नाम महर्षि अगस्त्य के नाम पर रखा गया है। मान्यता है कि उन्होंने ही इस तारे की खोज की जिसके कारण उनका नाम इस तारे को मिला। तारा अस्त होने के बाद मौसम के रुख में परिवर्तन की संभावना बनती है।
इस खगोलीय घटनाक्रम के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है। इस समय सूर्य हमारी पृथ्वी के सबसे करीब होता है, जिससे गर्मी स्वाभाविक रूप से बढ़ी रहती है। पूरा घटनाक्रम नौ दिन तक प्रभावी रहता है। इस लिए इसे नौतपा कहा जाता है। इस बार जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से ही तापमान में अधिकता बनी है। -अतुल कुमार सिंह, मौसम विज्ञानी, आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र