गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में श्रद्धांजली सभा का आयोजन किया गया।
चौक बाजार। नाथ पंथ तीन पीढ़ियों से देश का मार्गदर्शन कर रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अब तक समरसता के जरिए गोरक्षपीठ ने सदैव समाज को दिशा और दशा प्रदान किया है। एक संत अपने क्रियाकलापों, गतिविधियों, त्याग और तपस्या से युग पुरुष बन सकता है।
उक्त बातें गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय दिग्विजयनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज और दिग्विजयनाथ बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ महाराज की 56वीं तथा ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बतौर मुख्य वक्ता पूर्व आचार्य, नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़ग वासला पुणे, डॉ. राजेंद्र भारती ने कहीं।
उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर विकास का पर्याय बन गया है। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने 1932 में एक हाईस्कूल की स्थापना के साथ मैकाले की शिक्षा नीति के विरुद्ध लोगों में भावना जगाई। उन्होंने कहा कि यह महंत दिग्विजयनाथ की सोच थी कि हम ऐसे युवा तैयार करेंगे जो सनातनी हों। उनकी धारणा थी कि जाति के घोंसले से बाहर निकले बिना समाज उन्नति नहीं कर सकता।
श्रद्धांजलि समारोह के मुख्य अतिथि सोंगल कैथल हरियाणा से पधारे महंत पीर शेरनाथ ने नाथ पंथ के सामाजिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए अपनी बात रखी। अध्यक्षीय उद्बोधन चौक शिक्षण संस्थाओं के सदस्य राज दीपक त्रिपाठी ने दिया। दिग्विजयनाथ बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य सपना सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। आभार दिग्विजयनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. हरिन्द्र यादव ने प्रकट किया। कार्यक्रम का संयोजन प्रमोद कुमार सिंह एवं संचालन डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने किया।