फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharajganj News: खताैनी से फिर नाम हटा, खेत में लगा निशान

Wed, 18 Dec 2024 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
विज्ञापन
विज्ञापन
महराजगंज। सीलिंग की भूमि पर जिम्मेदारों का कारनामा देख हर कोई चौक जाएगा। निचलौल क्षेत्र के सेमरहना (बरगदही) गांव में करीब 19.28 एकड़ सीलिंग की भूमि में झोल है। मामला सामने आया तो खतौनी से नाम हटा दिया गया।
विज्ञापन

सीमांकन कर लाल झंडी भी लगाया। हैरानी की बात है की मामला ठंडा होते ही लाल झंडी भी उखड़ गई। गेहूं की बुआई भी हो गई और खतौनी में नाम भी चढ़ गया। मामले को तुल पकड़ा देखकर जिम्मेदारों ने मंगलवार को खेत जोतवा दिया।
सीलिंग की भूमि की खरीद फरोख्त का मामला उजागर होने के बाद से ही खेल हो रहा है। मामले में अमर उजाला ने 15 दिसंबर को खबर प्रकाशित किया था। इसके बाद जिम्मेदारों ने मंगलवार को आनन-फानन में सीलिंग की भूमि पर ट्रैक्टर चलवाकर फसल नष्ट करा दिया। मौके पर मौजूद राजस्व निरीक्षक मनीष पटेल ने कहा कि सीलिंग की भूमि पर लगे फसल को नष्ट कर कब्जा हटा दिया गया है। इस दौरान नायब तहसीलदार अभिषेक मिश्रा सहित पुलिस टीम भी मौजूद रही।
विज्ञापन

क्षेत्र पंचायत सदस्य पूनम गुप्ता ने साक्ष्यों के साथ अध्यक्ष राजस्व परिषद तथा प्रमुख सचिव राजस्व अनुभाग 12 और आयुक्त गोरखपुर मंडल गोरखपुर को साक्ष्यों के साथ शिकायती पत्र भेजकर बताया है कि सिलिंग अधिनियम के अंतर्गत सरकार बनाम नरसिंह मणि निवासी जमुई पंडित में न्यायालय के आदेश पर 28 अप्रैल 2023 को 19.28 एकड़ भूमि सिलिंग में निकाली गई थी, लेकिन सिलिंग की भूमि चकबंदी होने के कारण नये गाटा में परिवर्तित हो गई।
इसलिए पुराने नंबरों के बदले नई गाटा नंबर से सिलिंग भूमि प्राप्त की गई। इसी क्रम में न्यायालय की ओर से 23 जनवरी 2024 को एक पत्र जारी कर अमलदरामद के लिए तहसीलदार को भेजा गया, लेकिन जिम्मेदार की ओर से पत्र को अनदेखा कर दिया गया। ऐसे में भूमि की अमलदरामद न होने के चलते सीलिंग की भूमि उन्हीं के नाम से रह गई। इस दौरान उक्त सीलिंग की भूमि धड़ल्ले से बैनामा होती रही।
इतना ही नहीं जिम्मेदार जानकारी के बावजूद भी बैनामे के आधार पर नाम दुरुस्ती व दाखिल खारिज करते रहे। वहीं आदेशित सिलिंग भूमि का अमलदरामद करने के लिए एक बार फिर से अपर जिलाधिकारी की ओर से 16 नवंबर 2024 को पत्र जारी कर नये गाटों को सिलिंग खातों में दर्ज करने के लिए निर्देशित किया गया था।
उसके बाद तहसीलदार की ओर से 16 नवंबर 2024 को ही सभी गाटों को श्रेणी चार क (उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम के अंतर्गत खतौनी) में दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं सीलिंग की भूमि का सीमांकन कराकर लाल झंडी भी लगा दी गई। सीलिंग की भूमि के खतौनी में फेरबदल कर पुनः बैनामादारों के पक्ष में खतौनी जारी कर उनका नाम दर्ज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें