महराजगंज। ग्रामीण इलाकों में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट गरीब और अनपढ़ महिलाओं को कर्ज देकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। एजेंट बिना गारंटी के महिलाओं को 40 हजार से पांच लाख तक का ऋण दे रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब ये एजेंट पैसा वसूलने के नाम पर महिलाओं के साथ गाली-गलौज, धमकी और बदसलूकी पर उतर आते हैं। पनियरा क्षेत्र के रानीपुर गांव की बंदना चौहान ने बताया कि एक साल पहले उन्होंने घर बनाने के लिए माइक्रो फाइनेंस से 50 हजार रुपये का ऋण लिया था।
एजेंट ने उस वक्त ब्याज दर की कोई जानकारी नहीं दी। छह माह बाद वह आया और बोला की 90 हजार रुपये बकाया है। मैं यह सुनकर हैरान रह गई। किसी तरह 20 हजार रुपये चुका दिया, लेकिन फिर फरवरी माह में एजेंट घर आया और पैसा मांगने लगा। जब विरोध किया तो उसने जमीन पर ढकेल दिया और घर में रखा मोबाइल, बर्तन उठा ले गया।
इसी गांव की कमलावती ने बताया कि उन्होंने छोटे व्यवसाय के लिए तीन किश्तों में कुल 1.20 लाख रुपये का कर्ज लिया था। कुछ महीने बाद जब वह किश्त चुकाने में असमर्थ हो गईं तो एजेंट ने उनके घर से गैस सिलिंडर, चूल्हा, अनाज सहित जरूरी सामान उठा ले गया। उन्होंने बताया कि जनवरी के पहले सप्ताह में एजेंट फिर से घर आया और गाली-गलौज की। विरोध करने पर धमकी दी की अगर पैसा नहीं दिया तो अंजाम बुरा होगा।
ऐसी ही कहानी रानीपुर के रिंका की भी है। उन्होंने बाइक खरीदने के लिए चार किश्तों में 1.60 लाख रुपये कर्ज ली, लेकिन उन्हें 25 प्रतिशत ब्याज दर की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि दो माह बाद एजेंट वसूली के लिए आया, लेकिन जब पैसे नहीं दे पाए तो गाली-गलौज करने लगा। आखिरकार थक-हारकर मैंने 10 हजार रुपये जमा किया।
ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट जान बूझकर गुमराह करते हैं। ऋण देते समय ब्याज दर की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती और न ही कोई दस्तावेज दिया जाता है। एजेंट जबरन सामान उठा ले जाते हैं।