सितंबर 2017 में तत्कालीन डीएम ने गोसदन के प्रबंधक विमल पांडेय की छुट्टी कर दी। उनके स्थान पर भाजपा नेता जितेंद्र पाल सिंह को प्रबंधक बनाया। मंडल के विभिन्न जनपदों से छुट्टे गोवंशीय पशुओं को गोसदन में लाकर आश्रय दिया गया। कुछ महीनों में ही यहां पशुओं की संख्या दो हजार के करीब पहुंच गई।
तीन नए शेड भी बन गए और गो सेवकों की नियुक्ति की गई। लिहाजा खेती भी बढ़ी और 180 एकड़ में चारे की खेती की जाने लगी। इस बीच फरवरी 2019 में डीएम ने गोसदन प्रबंधक को हटा दिया। पूरी व्यवस्था की कमान अफसरों ने संभाली।
जून 2019 के पहले सप्ताह में हुई 60 से अधिक गोवंशीय पशुओं की मौत के बाद व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए डीएम अमरनाथ उपाध्याय ने गोसदन का कामकाज देख रहे एसडीएम निचलौल देवेंद्र कुमार का स्थानांतरण कर दिया। फिर सत्यम मिश्रा को निचलौल का एसडीएम बनाया गया।
उन्होंने डीएम की पहल पर व्यवस्था की बेहतरी के नाम पर करीब 148 एकड़ भूमि महज दो नामदारों को आवंटित कर दिया। मोटी रकम देकर भूमि का आवंटन लेने वाले नामदारों ने गोसदन की शर्तों को दरकिनार कर गोसदन की भूमि पर व्यावसायिक खेती शुरू कर दी है।
इधर खेती का रकबा बढ़ता गया, उधर गोवंशीय पशुओं की सांसे थमने लगीं। सीएम के आदेश पर मामले की जांच कर रहे कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने गोसदन के अभिलेखों को कस्टडी में ले लिया है। मंगलवार को बीडीओ निचलौल रविंद्र वीर को भी निलंबित कर दिया गया है।
महराजगंज गोसदन मधवलिया में बेहतर व्यवस्था के लिए दावें तो खूब किए गए लेकिन हालात नहीं बदले। करीब 1623 गोवंशीय पशुओं के लापता होने के मामले में डीएम समेत पांच अफसरों के निलंबन के बाद अफसरों की कथित कारगुजारी की पोल परत दर परत खुलने लगी है।
सूत्र बताते हैं कि गोसदन में बेहतर दवा तो दूर सरकारी दवाओं की उपलब्धता भी दूर की कौड़ी हो गई थी। प्रति एक पशु को एक किलो दाना (पौस्टिक आहार) दिए जाने की व्यवस्था की गई थी लेकिन लक्ष्मी का रूप मानी जाने वाली गोमाता के चारे को नामदारों ने लक्ष्मी (रुपये) के लिए ही सौदा करना शुरू कर दिया।
करीब डेढ़ माह से गोसदन में दाना नहीं है। इसके अतिरिक्त पेट के कीडे़ व किलनी की दवा भी गायब है। इसके लिए डेढ़ माह पूर्व डिमांड बनाकर एसडीएम निचलौल को भेजा गया था। लेकिन अब तक उसकी खरीदारी नहीं की गई। पेट के कीडे़ व किलनी की दवा के अभाव में भी गोमाता की जान जाती रही।
इस बार महज गोसदन की महज सात एकड़ भूमि पर ही चारे की बुआई की गई थी। जो अब खत्म होने के कगार पर हैं। अगले सप्ताह से हरे चारे के लिए गोवंशीय पशुओं को तरसना पड़ सकता हैं।
वहीं, स्टाक में चोकर और बरान की कम बताई जा रही है। समय रहते इनकी व्यवस्था नहीं की गई तो हालात खराब होना तय है।
चारे की भूमि पर बना दिया गांधी उपवन
बता दें कि गोसदन की जिस भूमि पर चारे की खेती होती थी। उसपर डीएम के आदेश पर गांधी उपवन बना दिया गया है। इसके चलते खेती की भूमि कम पड़ गई है। खेत तैयार करने के लिए गोसदन के व्यवस्थापकों ने एसडीएम से 15 एकड़ भूमि को चिन्हित कराने और चारा बुआई के लिए पत्र भेजा था। लेकिन वह भी 25 दिनों से साहब के टेबल की धूल खा रहा है।
बदहाल हुआ गोसदन, चमक उठा गेस्ट हाउस
गोसदन मधवलियां का प्रभार संभालने के साथ एसडीएम सत्यम मिश्रा ने वहां के विश्राम गृह, बैठक कक्ष व प्रशासनिक कार्यालय का रंग रोगन कराने के साथ ही टाइल्स वगैरह लगवा कर चकाचक कराया था। अब डीएम समेत एसडीएम को शासन ने निलंबित कर दिया है।
तब गोसदन में इस बात की चर्चा हो रही है कि साहब ने गोसदन को तो बदहाल और कंगाल बना दिया लेकिन आफिस व गेस्ट हाउस को चकाचक करा दिए। लोगों ने बताया कि गोसदन में बने एसडीएम के चेंबर में जल्द ही एसी भी लगाई जानी थी।
तीन गांवों के पशु आश्रय से 270 गोवंशीय पशु ‘लापता’
गोवंशीय पशुओं के नाम पर जिला गोसदन में ही नहीं गांवों में भी लूट मची हैं। जिला गोसदन से सटे मैरी, पिपरियां व झरवलियां में मनरेगा योजना से बनाए गए पशु आश्रय से करीब 270 गोवंशीय पशु लापता हैं।
इसे लेकर भी इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हैं। बता दें कि निचलौल ब्लॉक के ग्राम सभा मैरी स्थित जिला गोसदन मधवलियां परिसर में ही ग्राम सभा मैरी, पिपरियां व झरवलियां में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत लाखों की लागत से तीन पशु आश्रय शेड बनाए गए हैं।
इनमें गोवंशीय पशुओं पर ग्राम सभाओं ने लाखों खर्च भी किए लेकिन लेकिन बीते शनिवार को गोवंशीय पशुओं की गणना करने पहुंचे अपर आयुक्त प्रशासन अजय कांत सैनी को अफसरों ने पशु गणना के दौरान ग्राम सभाओं के शेड में रहे पशुओं की भी गणना गोसदन के नाम पर करा दी।
ऐसे में सवाल उठता हैं कि ग्राम सभाओं के तीनों शेड में रह रहे 270 पशु गोसदन के थे तो ग्राम सभाओं ने करीब ढाई से तीन लाख रुपये कहां खर्च किए। यही नहीं सूत्र बताते हैं कि गोसदन में हुए भारी वित्तीय अनिमित्ताओं में बीडीओ की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
शुओं के भरण पोषण के लिए शासन ने तीनों ग्राम सभाओं में कुल 13.50 लाख रुपये भी दिये थे। इनमे से करीब तीन लाख रुपये ग्राम सभाओं द्वारा कागजों में ही खर्च कर दिए गए हैं।
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के नियमों को ताक पर रख बीडीओ निचलौल रविन्द्र वीर यादव ने ग्राम सभा मैरी स्थित गोसदन परिसर में ग्राम पंचायत झरवलिया व पिपरियां का लाखों रुपये खर्च कर दिया, जबकि मनरेगा योजना का पैसा सबंधित ग्राम सभाओं में ही खर्च किया जा सकता है। मंगलवार को मामले में दोषी पाए जाने पर बीडीओ रवींद्रवीर यादव को भी निलंबित कर दिया गया है।
गोवंशों की मौत का कारण बन रहा गहरी सुरक्षा खाई
जिला गोसदन मधवलियां में खेती के लिए लीज पर भूमि दिए जाने का मामला यूं तो कोई नया नहीं हैं। पिछले एक दशक से गोसदन की आय बढ़ाने और गोसदन की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए कृषि कार्य के लिए लीज पर भूमि दी जाती हैं। लेकिन इसके लिए गोसदन बाकायदा अपनी शर्तों पर भूमि देता था।
इनमें ज्यादातर स्थानीय किसानों के नाम ही लीज बनाई जाती थी। लेकिन इस बार एक बडे कृषि फार्म होल्डर को जमीन दी गईं है। लीज पर जमीन लेने के बाद फार्म होल्डरों की ओर से खुदवाई गईं सुरक्षा खाई गोवंशीयों के लिए मौत की खाई बन रही है। इसे लेकर भी गोसेवकों में आक्रोश हैं।
सूत्र बताते हैं कि बीते वर्ष तक एक भी बाहरी व्यक्ति को भूमि लीज पर नहीं दी गईं। लेकिन इस वर्ष जिलाधिकारी ने नियमों को ताक पर रख मेलोडी एग्रो फार्म को 104 एकड़ और कुशीनगर के एक चर्चित व्यक्ति को करीब 38 एकड़ भूमि आवंटित की गई।
इस भूमि पर फर्म के मालिकानों ने सुरक्षा खाई खुदवा कर तार बाड़ लगवा दिया है। यही नहीं गोसदन के शर्तों के खिलाफ भूमि पर पक्का निर्माण की तैयारी हैं। इसके लिए ईंट भी गिराए जा चुके हैं।
एक गोसेवक ने बताया कि जो भूमि डीएम ने आवंटित की हैं, वह पशुओं के चारागाह के लिए बेहतर थी। जंगल के पास होने के कारण पशु इसी भूमि में चरते थे। अब यह कृषि योग्य बना दिया गया है। इसी के बगल में खोदी गईं गहरी सुरक्षा खाई पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
लीज पर दी जाने वाली कृषि योग्य भूमि में व्यावसायिक खेती की पाबंदी है। परंपरागत खेती कर पुआल व भूसा गोसदन को देने के शर्त पर भूमि आवंटित की जाती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। गोसदन के आधे से ज्यादा भूमि पर पहली बार गन्ने व सूरजमुखी की खेती लहलहाएगी। इससे चारे का संकट पैदा होना लाजिमी है।
चारागाह को लील गई खेती और पौधरोपण
पांच सौ एकड़ में फैले मधवलिया गोसदन में गोवंशीय पशुओं के चरने के लिए चारागाह का अभाव हो गया है। गोसदन की बेहतरी के कोरे इंतजाम के बीच 500 एकड़ भूमि में से करीब 350 एकड़ भूमि पर खेती होती है। करीब सौ एकड़ में वन विभाग ने पौधरोपण कराया है।
शेष पर करीब दस शेड बने हैं। इसमें से चार निर्माणाधीन, तीन तालाब समेत मंदिर व गोबर रखा गया है। बाकी भूमि पर चारागाह है। नाम न छापने की शर्त पर एक गोसेवक ने बताया कि कभी दो सौ एकड़ में फैला चारागाह आज 20 एकड़ में सिमट गया है।
चार मवेशी मरे और आठ बीमार
मधवलिया गोसदन में मंगलवार को चार मवेशी मर गए। जबकि आठ बीमारी की हालत में मरणासन्न की स्थिति में है। उनका इलाज पशु चिकित्सक दिलीप सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीमार मवेशियों का इलाज बेहतर ढंग से किया जा रहा है।