महराजगंज। ग्राम्य विकास की कुछ योजनाएं ऐसी हैं जिनकी मदद से ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलकर संसाधन बढ़ाए जा सकते हैं, लेकिन प्रचार प्रसार के अभाव में लोगों को योजनाओं से विभाग नहीं जोड़ पा रहा है। आर्थिक संपन्न लोगों का साथ लेकर गांव के विकास के लिए वर्ष 2021 से प्रभावी मातृभूमि योजना के लिए पंचायतीराज विभाग एक भी आवेदक नहीं तलाश कर सका।
2021 सितंबर को प्रदेश सरकार ने उप्र मातृभूमि योजना शुरू की। योजना के तहत सरकार ने आर्थिक रूप से मजबूत लोगों के साथ मिलकर मातृभूमि विकास का खाका खींचा था। इसके तहत देश-विदेश अथवा गांव में रहने वाले आर्थिक रूप से मजबूत लोगों को सरकार का सहयोगी बनाने की तैयारी थी। इसके तहत ग्राम पंचायत में विकास कार्य कराने के इच्छुक लोगों का सरकार ने पूरा सहयोग का विकल्प दिया। मातृभूमि विकास के लिए काम की लागत का 60 प्रतिशत धन व्यक्ति को और 40 फीसदी धनराशि सरकार को उपलब्ध करानी थी। इसमें आर्थिक मदद देने वाले का शिलापट्ट पर नाम भी लिखवाया जाना था।
विकास के लिए निजी संस्था के लिए रास्ते खोले गए थे। इच्छुक लोगों को खोजने की जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग को सौंपी गई। योजना को शुरू हुए तीन साल बीत गए लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। इतना ही नहीं अभी तक अधिकारी एक भी व्यक्ति नहीं खोज सके जो विकास में सहयोग देने की इच्छा रखता हो। ध्यान देने योग्य बात यह है कि विभाग ने इसे प्रचारित-प्रसारित करने के लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं समझी जिसके कारण यह महत्वपूर्ण योजना सिर्फ कागजों में ही सिमट कर दम तोड़ रही है।
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कराए जा सकते हैं यह कार्य
मातृभूमि योजना के तहत स्कूल, काॅलेज में कक्षाओं का निर्माण, स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना, सामुदायिक भवन, बरात घर, स्किल सेंटर का निर्माण, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, उप चिकित्सा केंद्र भवन, साज-सज्जा व उपकरण व्यवस्था, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, स्टेडियम, व्यायामशाला निर्माण, सीसी टीवी कैमरा, वाईफाई, स्टेडियम के साथ व्यायामशाला, फायर स्टेशन, आरओ प्लांट, सोलर एनर्जी स्ट्रीट लाइट जैसे कार्य कराए जा सकते हैं।
प्रदेश सरकार की मातृभूमि योजना के तहत कोई भी सक्षम व्यक्ति अपने गृह क्षेत्र अथवा किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्य करा सकता है, इसमें सरकार भी मदद करेगी। योजना का प्रचार-प्रसार कराया जाएगा जिससे इच्छुक लोग योजना के तहत ऐसा कर सकें।
श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ