महराजगंज। जिले के अलावा आसपास के जनपदों के दर्जनों बेरोजगार युवकों से करोड़ों ठगी करने के आरोपी अजीत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने कई अहम जानकारियां पुलिस को दीं। भवानीपुर (कुर्मी टोला) गांव के आनंद सिंह ठगी के शिकार हुए हैं। उनकी ओर से पुलिस को तहरीर दी गई थी।
जानकारी के अनुसार, मास्टरमाइंड अजीत सिंह नई दिल्ली के द्वारका, सेक्टर-18, नई राष्ट्रीय समिति का निवासी है। उसके छह अन्य साथियों पर महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर और बस्ती जिलों के बेरोजगार युवकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है। इस मामले में गोरखपुर जिले के चौरी चौरा थाने में पहले ही मामला दर्ज हो चुका था और 25 दिसंबर 2024 को अजीत सिंह सहित छह अन्य लोगों के खिलाफ एक और केस दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक ने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी थी और विशेष कार्य बल (एसओजी) ने भी जांच शुरू कर दी थी। क्राइम ब्रांच की टीम ने गहन जांच-पड़ताल के बाद मुख्य मास्टरमाइंड अजीत सिंह को पश्चिम बंगाल के कोलकाता, ग्रीन पार्क से गिरफ्तार किया। पनियरा थाने में पूछताछ के बाद उसे बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। कुछ ने खेत बंधक रखा तो कोई उधार लेकर दिया था रकम : पीड़ित ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार और रिश्तेदारों को आरोपियों के बारे में बताया, जिसके बाद उनके घरवाले पैसे देने को तैयार हो गए। पैसे की व्यवस्था के लिए उन्होंने रिश्तेदारों से उधार लिया और कुछ ने तो अपने खेत तक बंधक रख दिए। आरोपियों ने उन्हें गोरखपुर बुलाया और मिलने का स्थान बताया। कुछ दिनों बाद आरोपियों ने फोन कर कहा कि वे काठमांडो दर्शन करने जा रहे हैं, इसलिए पीड़ित 15 से 20 लाख रुपये और मूल दस्तावेज लेकर पनियरा ब्लॉक के सामने खड़े रहे। पीड़ित वहां पहुंचे और आरोपियों को पैसे व दस्तावेज सौंप दिए। बदले में आरोपियों ने वादा किया कि जल्द ही उन्हें उत्तर प्रदेश सचिवालय में नौकरी मिल जाएगी। कुछ समय बाद दीपक दुआ, मुख्य मास्टरमाइंड अजीत सिंह, अरविंद कुमार देशवाल और रूबी ने पीड़ितों को लखनऊ बुलाया। वहां उन्हें उत्तर प्रदेश सचिवालय में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र दिए गए।
दिल्ली बुलाकर दिया था झांसा :पीड़ित नियुक्ति पत्र लेकर लखनऊ सचिवालय पहुंचे, लेकिन वहां सच्चाई का पता चला। सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि नियुक्ति पत्र और सभी दस्तावेज फर्जी है। कोई भी नियुक्ति उनके नाम से जारी नहीं की गई थी। आरोप है कि पीड़ितों ने तुरंत आरोपियों से संपर्क किया, तो उन्हें दिल्ली बुलाया गया। दिल्ली पहुंचने पर आरोपियों ने कहा कि चिंता न करें, जल्द ही किसी अन्य विभाग में नौकरी लगा देंगे। पीड़ित दिल्ली से वापस लौट आए, लेकिन कुछ दिनों बाद जब कोई प्रगति नहीं हुई, तो उन्होंने अपना पैसा वापस मांगा। इस पर आरोपी भड़क गए और धमकी देने लगे।