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नेपाल का नया कानून मधेशियों को स्वीकार नहीं

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नेपाल का नया कानून मधेशियों को स्वीकार नहीं
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अब भारतीय महिला से विवाह करने पर सात साल बाद मिलेगी नागरिकता
मधेशी नेता बोले : समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। भारत-नेपाल के लोगों के बीच वैवाहिक रिश्ते बनने में पेंच नजर आ रहा है, क्योंकि नेपाल सरकार का नया नागरिकता कानून मधेशियों की मुश्किलों को बढ़ा सकता है। भारतीय महिला से विवाह के बाद उसे सात साल बाद नागरिकता देने के प्रावधान से मधेशी समुदाय नाराज है। मधेशी नेता इस मसले को लेकर आंदोलन तेज करने के मूड में हैं। नया कानून मधेशियों को स्वीकार नहीं है। सभी ने इस मसले पर क्रमश: तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
समाजवादी पार्टी रूपनदेही जिले के वरिष्ठ नेता इस्लाम खान ने बताया कि संविधान संशोधन करने के लिए मधेशी मोर्चा के लोग आंदोलन कर रहे हैं। मधेशी समुदाय को दरकिनार करते हुए उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मधेशी समुदाय के खिलाफ ही विधेयक पारित किया जा रहा है। समस्या का समाधान नहीं हुआ आंदोलन तेज होगा।
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भैरहवा विधायक संतोष पांडेय ने कहा कि मधेशियों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 17 साल पूर्व नेपाल में जन्म लिए बच्चों को नागरिकता मिल जाती थी, लेकिन अब क्यों नहीं दी जाएगी। माता पिता नेपाल के नागरिक रहेंगे, जबकि उन्हीं का बेटा नागरिकता से वंचित हो जाएगा।
राष्ट्रीय जनता पार्टी रूपनदेही के जिलाध्यक्ष अजय वर्मा ने कहा कि मधेशी नेताओं को आश्वासन देकर गुमराह किया गया है। सरकार में दो तिहाई बहुमत होने के बाद भी मधेशी समुदाय के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। सरकार से मांग है कि भारतीय महिला के साथ विवाह होने पर नागरिकता में छूट दी जाए।
पांच नंबर प्रदेश के विधायक कल्पना पांडेय ने कहा कि नेपाल सरकार ने नागरिकता सहित अन्य सरकारी कोटा से मधेशियों को वंचित किया है। सरकार को भारतीय महिला से शादी के मामले में नागरिकता को लेकर छूट देने की जरूरत है। सीमावर्ती नेपाल के तराई क्षेत्रों में रहने वाले 22 जिलों के लोग भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में शादियां करते हैं। इस कानून से ज्यादातर मधेशियों को परेशानी होगी।
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नेपाल में ज्यादातर मधेशी हैं
नेपाल की कुल आबादी का करीब 50 प्रतिशत मधेशी समुदाय के लोग हैं, फिर भी मधेशी नागरिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। नेपाल में राणा शासकों के बाद पहाड़ी मूल के लोगों की सरकार रही है, जिसमें नेपाल का मधेशी बाहुल्य क्षेत्र तराई इलाकों के मुकाबले विकास के नाम पर बहुत ही पिछड़ा और अशिक्षित है। लोग तराई क्षेत्र में या तो खेती करते हैं या काम के सिलसिले में घरों से निकल कर भारत या विदेशों का रुख करते हैं।
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22 जिलो के मधेशी होंगे प्रभावित
नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के रूपनदेही, नवलपरासी, कपिलवस्तु, दांग, बाके ,बर्दिया, कैलाली, बीरगंज, सर्लाही, सुनसरी, मोरंग समेत 22 जिलों के लोग ज्यादा प्रभावित होंगे। इसके साथ ही भारत के अलावा अन्य देशों में शादी करने वाले नेपाली नागरिकों को इसी कानून का पालन करना होगा। तराई के 22 जिलों में रहने वाले मधेशियों की बोली-भाषा, खान-पान, रहन-सहन पहाड़ी नेपालियों से अलग है। नेपाल की सदन में 33 सांसद मधेशी हैं, इसके बाद भी नेपाल के संविधान में मदेशी समुदाय को कोई जगह नहीं मिल पाई, जिसको लेकर चार साल पूर्व करीब छह माह चले मधेेशियों के आंदोलन के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हो सकी।
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भारत और नेपाल का वैवाहिक संबंध प्रभावित होगा
कम्युनिष्ट पार्टी नेपाल रूपनदेही जिला कमेटी सदस्य और पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने बताया कि सरकार की परामर्श समिति नागरिकता बिल संसद में पास करने जा रही है। यह कानून सभी विदेशी महिला के साथ है। चाहे वह भारतीय हो या अन्य किसी भी देश की महिला। नेपाली नागरिक के साथ विवाह करने के बाद उसे सात साल बाद नेपाल की नागरिकता मिलेगी। उनसे होने वाले संतान को भी सरकार ने नागरिकता देने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि भारत के साथ हम लोगों का सदियों पुराना रिश्ता है। इस कानून के बनने के बाद भारत और नेपाल का वैवाहिक संबंध प्रभावित होगा।
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