महराजगंज। लो वोल्टेज ने शहरवासियों की नींद छीन ली है। ट्रांसफाॅर्मर ओवरलोड चल रहे हैं। गर्मी बढ़ने के कारण बिजली की खपत बढ़ गई है।
आठ मोहल्ले में रात में लो वोल्टेज की समस्या है। करीब 20,000 की आबादी समस्या से पीड़ित हैं। जिले में मार्च में 42 मिलियन यूनिट बिजली की खपत होती थी। अप्रैल-मई में बढ़कर 54 मिलियन यूनिट हो गई है।
12 मिलियन यूनिट बिजली की खपत बढ़ी है। एसी, कूलर का प्रयोग बढ़ने से लोड़ बढ़ रहा है। इससे लो वोल्टेज की समस्या हो रही है। शहर में बिजली आपूर्ति बेहतर करने के लिए ट्रांसफाॅर्मर का लोड बढ़ाया गया था, लेकिन गर्मी बढ़ती समस्या शुरू हो गई।
शहर में 25 मोहल्लों में लगे 42 ट्रांसफाॅर्मर ओवरलोड चल रहे हैं। दिन में करीब चार से पांच बार बिजली आने-जाने का क्रम जारी रहता है। बिजली निगम की ओर से आपूर्ति 24 घंटे बेहतर ढंग से देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। बिजली कटने के बाद कुछ देर में आ जाती है। रात में भी दो से तीन बार बिजली गुल होती है।
दूसरी ओर धनेवा-धनेई में बिजली उपकेंद्र भी अब तक संचालित नहीं हो सका है। अगर यह संचालित हुआ रहता तो शहर के लोगों को लो वोल्टेज की समस्या नहीं होती। बैंकुंठपुर और मुख्यालय पावर हाउस पर दबाव कम होता। धनेवा-धनेई में 3.13 करोड़ रुपये की लागत से विद्युत उपकेंद्र बन रहा है। इसे जून में संचालित होने की उम्मीद है। करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
नए विद्युत उपकेंद्र से पांच हजार उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा और लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिलेगी। बैकुंठपुर नगर फीडर और चौक फीडर का लोड भी कम होगा, जिससे पूरे क्षेत्र में बेहतर और स्थिर बिजली आपूर्ति हो सकेगी।
धनेवा-धनेई विद्युत उपकेंद्र से मऊपाकड़ से लेकर निचलौल रोड तक के आबादी वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को फायदा होगा। शहर में 11000 कनेक्शनधारक हैं। इस संंबंध में विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता -शैलेंद्र गौतम ने बताया क्षेत्र में 81 ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है। 35 नए ट्रांसफाॅर्मर लगे हैं। बेहतर ढंग से बिजली आपूर्ति कराने के लिए हर संभव प्रयास जारी है।