मौसम का मिजाज : बूंदाबांदी गेहूं की फसल व बागवानी के लिए लाभप्रद
निचलौल (महराजगंज)। कृषि विज्ञान केंद्र बसूली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वी. चंद्रन ने बताया कि हल्की बूंदाबांदी से अधिकांश फसलों को अच्छा फायदा हुआ है। जबकि कुछ फसलों के लिए नुकसानदायक है। वहीं, बागवानी के लिए बूंदाबांदी अत्यंत लाभप्रद है। फसल में सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं है।
कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर गोंडा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राम लखन सिंह ने मौसम में बदलाव के मद्देनजर कुुुछ फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया है। उन्होंने कहा कि गेहूं, केला एवं गन्ना की फसल में इस समय सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं है। फसल की बढ़वार अच्छी होगी। मौसम साफ होने पर उर्वरकों एवं खरपतवार नाशी रसायनों आदि का प्रयोग अत्यंत लाभकारी होगा। फसलों में पर्याप्त नमी होने पर घने कोहरे एवं पाला से फसल का बचाव होगा। दरअसल दलहनी एवं तिलहनी फसलों में कीट एवं रोगों के प्रकोप की संभावना है। आलू की फसल में झुलसा रोग से बचाव के लिए फफूंदनाशी रसायन डाइथेन एम 45 की ढाई ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। जिससे फसल की सुरक्षा की जा सके। क्योंकि आलू की फसल में हल्की बूंदाबांदी होने पर झुलसा रोग का तेजी से प्रकोप होता है।
मौसम खराब रहने तक अन्य फसलों में उर्वरकों एवं खरपतवारनाशी रसायनों का प्रयोग न करें। शीत लहर के प्रकोप से जानवरों के बाड़े की टाट-पट्टी या बोरी लगाकर सुरक्षा करें। दुधारू जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए गुड़ अजवाइन मेथी आदि को चारे के साथ खिलाएं।