निचलौल। नेपाल के पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बीते दिन हुई मूसलधार बारिश के चलते नारायणी (गंडक) नदी उफना गई थी। इसके चलते निचलौल ब्लॉक के टापू कहा जाने वाले सोहगीबरवा, भोतहा और शिकारपुर गांव में बाढ़ का पानी भर गया था। बाढ़ का पानी नीचे उतरा तो तबाही का निशान साफ साफ दिखने लगा। मंगलवार को लोग अपने कामकाज पर लौटने लगे हैं। वहीं दरवाजों पर बच्चों की झुंड उछल कूद मचाने लगे हैं।
सोहगीबरवा गांव में दुकान पर बैठे सुरेंद्र मुसहर, बिरजू मुसहर, दीपक, लालू यादव आदि लोगों ने कहा की बहुत कम समय में नदी का जलस्तर कम होने से राहत मिली है। नदी का जलस्तर कम होते ही गांव से पानी भी नीचे उतर गया है। लोग बाढ़ की चपेट आए सामान को सुखाने के साथ ही दुकान सजाने लगे हैं। इतना ही नहीं दरवाजों पर बच्चों का झुंड उछल कूद भी मचाने लगा है।
ऐसे में अब उन लोगों का जीवन फिर पटरी पर आने लगा है। अभी कुछ फसलें पानी में डूबी हैं। जिले के आला अधिकारी बाढ़ के दौरान यहां पर आए थे। उन्होंने तत्काल इलाज की व्यवस्था कराते हुए नुकसान की मुआवजा को जल्द दिलाने की भी बता कही। इन लोगों ने बाढ़ पीड़ितों के प्रति आला अधिकारियों की तत्परता की खूब सराहना की।
नायब तहसीलदार अभिषेक मिश्रा ने कहा की बाढ़ में जिन लोगों का नुकसान हुआ है। उनको आपदा के तहत जल्द ही मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।