महराजगंज। शहर के जयप्रकाश नगर के रहने वाला एसिड अटैक के मुख्य आरोपी अनिल वर्मा की मुश्किल बढ़ती जा रही हैं। पहले न्यायालय ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी, अब उसके अस्पताल का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया है। उसके अस्पताल से सितंबर व अक्तूबर माह में 52 बच्चे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती हुए थे। उसकी गहरी पैठ सरकारी अस्पताल में काफी अच्छी थी। जन्म के बाद बीमार होने वाले बच्चों को जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में भर्ती कराता था।
जानकारी के अनुसार, बीते 18 नवंबर को पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी अनिल वर्मा (40) और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों पर युवती पर तेजाब फेंकने का आरोप है। युवती की शादी तय हो गई थी। अनिल उसको लुभाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसने उसकी बात ठुकरा दी थी। आरोपी ने हमले में मदद के लिए अपने सहयोगी को 15,000 रुपये का भुगतान किया था। अनिल ने अपने एक सहयोगी 31 वर्षीय राम चरण की मदद से हमले की साजिश रची, जिसे उसने बैटरी एसिड और सर्जिकल दस्ताने की एक जोड़ी दी थी।
एसिड से घायल करने के बाद आरोपी ने पीड़िता के अस्पताल के बिलों का भुगतान किया और पीड़िता और उसके परिवार को पुलिस के पास न जाने की सलाह दी, क्योंकि उन्हें डर था कि जांच के दौरान उनका नाम सामने आ सकता है। सीसीटीवी फुटेज में उनकी कार की मौजूदगी, राम चरण के स्कूटर पर एसिड के दाग और उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड ने पुलिस को मामले को सुलझाने में मदद की। बाद में दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। दोनों को आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 326 ए (एसिड हमला), 120 बी (आपराधिक साजिश) और शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत केस दर्ज है।
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एसिड अटैक के मुख्य आरोपी के निजी अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। अब अस्पताल संचालित मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच में इसकी जानकारी मिली है कि उसके अस्पताल से दो माह में 52 बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
-डॉ. नीना वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी
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प्रपत्रों की जांच के बाद पता चलेगा की मेडिकल स्टोर का लाइसेंस किसके नाम पर है। अगर मुख्य आरोपी के नाम से मेडिकल स्टोर का लाइसेंस होगा तो निरस्त कर दिया जाएगा।
-शिव कुमार नायक, औषधि निरीक्षक