महराजगंज। तेंदुए का खौफ बीते चार दिन से अगल-अलग क्षेत्रों में है। कभी वह नदी के किनारे दिखता तो कभी गांव में पहुंच जाता। खुद को सुरक्षित रखने में लोग असहज हो गए थे। ठूठीबारी, निचलौल के अलावा नौतनवा क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर तेंदुए को दिखने की बात सामने आई थी। मंगलवार को जो कुछ हुआ उसे लेकर क्षेत्र के लोग वन विभाग को निष्क्रिय करार दे रहे हैं। उनके मुताबिक वन्य जीवों से सुरक्षा को लेकर विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं है।
मंगलवार को चकदह गांव के लालपुर में नदी के किनारे बकरी चरा रही महिला और दो युवकों को घायल करने के बाद गांव में दहशत का माहौल है। गांव के महेंद्र ने बताया कि तेंदुआ चार दिनों से झाड़ी में कभी-कभी दिखता था। बीते दिनों बगीचे कुछ कुत्ते दिख रहे थे, वे अचानक दिखने बंद हो गए। ऐसे लगा रहा है कि उसने उन्हें निवाला बना लिया होगा। आसपास के लिए इलाके में बीते चार दिन से लोग ज्यादा परेशान रहते थे। खेत की ओर से जरूरी काम से जाने वाले लोग परेशान रहते हैं।
बताया जा रहा है कि शावक की मौत हो गई है तो इसका कुनबा आक्रमक होकर फिर इस इलाके में हमला कर सकता है। जानकार बताते हैं कि वन्य जीव से सुरक्षा को लेकर अब तक वन विभाग कुछ नहीं कर सका है। जिले में 342 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन है। जंगली जीव-जंतु वन क्षेत्रों में हैं।
तमाम लोग हमले का शिकार होने के बाद आज भी दहशत में रहते हैं। हैरत की बात है कि वन क्षेत्र से घिरे क्षेत्र में मानव वन्यजीव संघर्ष कभी मुद्दा नहीं बना। चकदह गांव के बेलभार टोले पर बीते शनिवार को भी जंगल के किनारे बकरी चरा रहे सुरेश यादव को भी झाड़ी में छुपे तेंदुए ने घायल कर दिया था।