निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत निचलौल वन रेंज के जंगलों से सटे भारत नेपाल बाॅर्डर के सीमावर्ती गांवों में तेंदुए ने दो दिनों से आतंक मचा रखा था। सोमवार को तेंदुए कहीं नहीं दिखा, इससे लोगों ने राहत की सांस ली।
सोमवार को बार्डर से सटे सीमावर्ती गांव के रहने वाले वकील, कमलेश पासवान, ननकु, हीरालाल आदि ने बताया कि बीते शनिवार को एक तेंदुआ शिकार की तलाश में कनमिसवा गांव के सिवान स्थित गेहूं के खेत में बैठा था। इस दौरान चार लोगों पर हमला कर लहूलुहान कर दिया था।
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम जाल और पिंजरा लगाकर करीब 18 घंटों तक काफी मशक्कत की, लेकिन तेंदुआ टीम को चकमा देकर गेहूं की फसल से निकलकर भाग गया। उसके पदचिह्न बॉर्डर के आसपास दिखे थे। वहीं रविवार को कनमिसवा गांव के उत्तर भारत नेपाल बाॅर्डर से सटे गांव बनकटी में एक कुत्ते को कर मार डाला। उसके बाद फिर से तेंदुआ सीवान में भाग गया।
इस बीच तेदुएं को लेकर लोगों में काफी दहशत बनी रही। हालांकि राहत की बात यह है कि तेंदुआ तीसरे दिन लोगों को नहीं दिखाई दिया। ऐसे में आशंका जताया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में आतंक मचाने वाला तेंदुआ जंगल की ओर लौट गया है।
निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने कहा कि तेंदुए की निगरानी के लिए वन कर्मियों की टीम लगी है।