घुघली। छोटी गंडक नदी के किनारे की मादा तेंदुआ और उसके दोनों शावक छोटी गंडक नदी के किनारे डेरा जमाए हैं। वहीं रात में कोटियां, पकड़ियार बिशुनपुर, नारायण टोला, मेदनीपुर की सड़कों पर घूमते हैं। इससे लोगों में दहशत है।
तेंदुआ के शावक रात में सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। दिन में किसान अपनी खेती बारी तो कर ले रहे है, लेकिन गर्मी में रात में सड़क पर निकलना कठिन हो गया है।
शुक्रवार की रात में पकड़ियार-बिशुनपुर गांव के फूलबदन ने करीब 11 बजे तेंदुए को शावकों के साथ बालाक्षत्र घाट की तरफ जाते हुए देखा, डर के कारण उन्होंने शोर नहीं मचाया। उसी रात में करीब दो बजे बालाक्षत्र घाट पर स्थित मंदिर के पुजारी बनारसी दास ने भी तेंदुए को दो शावकों के साथ देखा। कुत्तों के भौंकने पर मादा तेंदुए ने उन्हें दौड़ाया और गन्ने के खेत में चली गई।
चार दिन पहले आई वन विभाग की टीम तेंदुए के आतंक को देखते हुए कोटिया गांव के घने बगीचे में स्थित भानु यादव के मुर्गी फार्म पर एक पिंजरा लगाकर उसमें एक मुर्गा रखकर छोड़ दिया। पांचवें दिन मुर्गे से बदबू आनी शुरू हो गई। उसको बदला नहीं गया, क्योंकि वन विभाग का कोई कर्मचारी आया ही नहीं। कोटिया मुर्गी फार्म के पास अपने घर के दरवाजे पर सोए बैजनाथ यादव ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात करीब 9.30 बजे हमारे बगल के रास्ते से मादा तेंदुआ अकेले जा रही थी। इसके कुछ समय बाद लौटकर बगीचे में जा छिपी।
बगीचे में आवास बनाए गुड्डू तिवारी ने बताया कि ग्रामीण अपने मवेशियों को झुंड बनाकर लाठी-डंडा लेकर चराते हैं। डिप्टी रेंजर कासिम अली ने बताया कि विभाग के लोग वहां गए थे। कोई सटीक लोकेशन नहीं मिल पा रही है।