शाम छह बजे नगर जामा मस्जिद से दसवीं मुहर्रम का जुलूस
सुरक्षा के रहे पुख्ता प्रबंध,ड्रोन से होती रही निगरानी
महराजगंज। नगर में निकले दसवीं मुहर्रम के जुलूस में जब या हुसैन की सदाएं गूंजी तो मानो फिजाएं भी गमगीन हो उठीं। मातमी धुन पर करतब दिखाने वाले अखाड़ों के साथ जुलूस ने नगर मुख्यालय के सभी मार्गों पर शाम लगभग आठ बजे तक भ्रमण किया। इसके बाद रात 08:30 बजे अकीदत के साथ शहर के महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के पीछे स्थित कर्बला में दफन किए गए।
इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे (नाती) हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद का है। इसमें पूरे 10 दिन विभिन्न चौराहों व मोहल्लों में चौक पर ताजियादार ताजिए स्थापित कर कर्बला में इंसानियत के लिए लड़ी गई जंग को याद करते हुए मातम करते हैं। नगर मुख्यालय के मौलाना शैफुध्वजा ने बताया कि यजीद को हुसैन ने अपनी इंसानियत के जरिये हराया। दसवीं मुहर्रम के दिन कर्बला के मैदान की यह जंग इसलिए याद करते क्योंकि इसमें यजीद व उसकी सेना हुसैन व उनके खेमे का पानी तक बंद करा दिया था लेकिन हुसैन को डिगा नहीं सके और सहादत देकर इस्लाम का झंडा बुलंद रखा।
पेश इमाम ने रुखसत किया जुलूस
नगर में दसवीं का जुलूस शाम छह बजे के आसपास सक्सेना चौक के निकट स्थित जामा मस्जिद से निकला। जुलूस को पेश इमाम मोइनुद्दीन ने फातिहा पढ़ने के बाद रुखसत किया जिसके बाद जुलूस का नेतृत्व शमशुल हुदा खान ने किया। उनके साथ नगर के प्रबुद्ध वर्ग के लोग सहाबुद्दीन शाह, सफी मोहम्मद, असलम, मुर्तजा खान, खैरुल्लाह, अलमुद्दीन शाह, जुमराती अंसारी आदि सबसे आगे तो उनके बाद ताजिया लेकर ताजियादार चलते मिले। सबसे पीछे सरडीहा, पिपरा बाबू व शहर के अखाड़े करतब दिखाते जुलूस का हिस्सा रहे। जामा मस्जिद से होकर जुलूस नगर सहकारी बैक, चौपरिया होते हुए उद्योग विभाग चौराहे पर पहुंचा जहां अन्य वार्डों से आए ताजिए का मिलाप कराने के बाद सभी कर्बला की तरफ रवाना हुए रात लगभग 08:30 बजे सिविल लाइन कर्बला में ताजिए अकीदत व एहतराम के साथ दफन किए गए।
वर्जन
दसवीं मुहर्रम के जुलूस की निगरानी ड्रोन कैमरे से की गई। तीन ड्रोन कैमरे से जुलूस की निगरानी कंट्रोल रूम से की गई। म हिला-पुरुष आरक्षी सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रहे। सिद्धार्थ, एडिशनल एसपी, महराजगंज।