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Maharajganj News: तामेश्वरनाथधाम कॉरिडोर में जमीन का फंसा पेच, निर्माण का बढ़ा इंतजार

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खलीलाबाद-धनघटा रोड से मंदिर तक बनाई जानी है फोरलेन सड़क
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परियोजना के तहत मंदिर के सुंदरीकरण सहित कराए जाने हैं कई कार्य
संतकबीरनगर। तामेश्वरनाथधाम कॉरिडोर की घोषणा हुए करीब एक साल होने को है, लेकिन अभी भी यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। परियोजना के फोरलेन सड़क के चौड़ीकरण में जमीन का पेच फंसा है। इस पर प्रशासन लगातार किसानों से सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी बात नहीं बन पाई है। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
तामेश्वरनाथधाम कॉरिडोर के फोरलेन सड़क निर्माण में छह गांवों के 11,400 किसानों की जमीन आ रही है। इनसे सहमति के आधार पर भूमि की खरीद की जानी है। इसके साथ तारेश्वरनाथ धाम परिसर के आसपास 25 लोगों के मकान और दुकान भी इसकी जद में आ रहे हैं। जिन लोगों के मकान और दुकान कॉरिडाेर में आ रहे हैं, उनमें से 10 लोगों ने सहमति प्रदान कर दी है, अन्य लोगों से सहमति लेने के लिए प्रशासन प्रयास कर रहा है।
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इस बीच कॉरिडोर के फोरलेन सड़क के लिए लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग किसानों को इस परियोजना से होने वाले फायदे मुआवजे की जानकारी देकर मनाने में जुटे हैं, लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिल पाई है। अभी कुछ दिनों पूर्व तहसीलदार खलीलाबाद की अध्यक्षता में किसानों की बैठक हुई, लेकिन इसमें भी जमीन का पेच नहीं सुलझ सका है। वैसे कॉरिडोर के लिए खलीलाबाद-धनघटा मार्ग से तामेश्वरनाथधाम तक 1.1 किलोमीटर मार्ग को फोरलेन और 3.2 किलोमीटर मार्ग को टू-लेन बनाया जाना है।
सड़क के चौड़ीकरण में नौरंगिया, तामा, शिवशंकरपुर, महुई, रामपुर और गिरधरपुर गांव के किसानों की जमीन ली जानी है। शासन स्तर से सड़क निर्माण और भूमि क्रय करने के लिए करीब 46 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
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बाजार भाव से मुआवजे की मांग कर रहे किसान
प्रशासन की ओर से जमीन के मुआवजे के लिए किसानों को सर्किल रेट से चार गुना दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि जमीन महंगी हो गई है, ऐसे में बाजार भाव से मुआवजा दिया जाना चाहिए। इस क्षेत्र के शशांक भारती, आनंद कुमार आदि ने कहा कि कॉरिडोर की घोषणा के बाद जमीन की कीमतों में काफी उछाल आया है।
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तामेश्वरनाथधाम कॉरिडोर के लिए भूमि का सीमांकन हो चुका है। लगातार सहमति के प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को सर्किल रेट का चार गुना या बाजार दर, जो भी अधिक होगी, उसके आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। भूमि का मामला जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
-आनंद कुमार ओझा, तहसीलदार, खलीलाबाद
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