इसका कारण कहीं न कहीं प्रदूषित हो रही हमारी जलीय पारिस्थिति तंत्र का अहम योगदान रहा है। नारायणी नदी पर पर्यटकों को लुभाने के साथ ही इनका नदी में इनकी संख्या बढ़ाने के लिए लगातार घड़ियालों को छोड़ा जा रहा है। इस दौरान क्षेत्राधिकारी सूर्यबली मौर्य, रेंजर सुनील राव,अभिषेक सिंह, रविंद्र प्रताप, अशोक सिंह, भोरिक, विजय बहादुर, ज्वाला प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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मगरमच्छ की तरह आक्रमक नहीं होते घड़ियाल
मगरमच्छ की तरह दिखने वाले घड़ियाल हिंसक जीव नहीं होते हैं। जबकि मगरमच्छ हिंसक होते हैं। घड़ियाल तय समय पर फरवरी में ही अंडे देते हैं।
पहले भी छोड़े जा चुके है 55 घड़ियाल
रेंजर सुनील राव ने कहा कि 4 अक्तूबर 2018 को नारायणी नदी के टेल फॉल पर वन्य प्राणी सप्ताह के तहत कार्यक्रम आयोजित कर 15 घड़ियाल के बच्चे छोड़े गए थे। 18 मार्च 2019 को दूसरी बार नारायणी नदी में आठ नर और 32 मादा सहित कुल 40 घड़ियाल के बच्चें छोड़े जा चुके हैं।