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Maharajganj News: सुख हो या दुख हमेशा साथ रहे किशन, सन्नी और विवेक, मौत ने भी नहीं छूटने दिया साथ

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तीनों की दोस्ती की मिसाल पूरे गांव में दी जाती थी
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जबतक जिए साथ रहे और मौत भी आई तो एक साथ
निचलौलय। पचमा केवटानी टोला के किशन, सन्नी और विवेक की दोस्ती ऐसी थी कि ग्रामीण उनकी मिसाल देते थे। तीनों के पिता आपस में सगे भाई थे। सुख हो या दुख तीनों हमेशा साथ रहे और मौत भी तीनों को एक साथ ही ले गई। परिजन के अनुसार, तीनों अपने-अपने परिवार का सहारा थे। तीनों परिवार की आर्थिक जरूरतों का बड़ा सहारा थे।
जानकारी के अनुसार, मृतक सन्नी पुत्र रामकयास (18) परिवार का इकलौता बेटा था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह करीब डेढ़ साल से पीएनसी प्लांट मदनपुरा में चाय बनाने का काम करता था। उसकी दो छोटी बहनें निशा और अंशु हैं। पिता रामकयास रोजी-रोटी के सिलसिले में तमिलनाडु में रहते हैं।
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बेटे की मौत की खबर से मां नीलम देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार यही कहकर बिलख रही थीं कि काश, सन्नी मेरी बात मान लिया होता तो यह घटना नहीं होती। संयोग यह भी रहा कि जिस दिन हादसा हुआ, उसी दिन सन्नी का जन्मदिन था। रामकयास बेटे सन्नी की मौत की खबर सुनकर बदहवास गए हैं। घर से अधिक दूरी होने के कारण बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके।



किशन के परिवार पर भी टूटा दुखों का पहाड़

मृतक किशन पुत्र रामबयास (14) के परिवार में छोटा भाई आदित्य है। उसके पिता भी रोजी-रोटी के लिए मुंबई में रहते हैं। किशन गांव के एक निजी स्कूल में पढ़ाई करने के साथ मजदूरी भी करता था। कम उम्र में ही परिवार की आर्थिक जरूरतों में हाथ बंटाने वाले किशन की मौत से मां पूनम देवी बेसुध हैं। बेटे को खोने के गम में उनका रो-रोकर बुरा हाल है। रामबयास रोजी रोटी के सिलसिले में मुंबई में है। बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए।
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विवेक की मौत से बेसहारा हुआ परिवार

तीनों में सबसे बड़ा दुख विवेक के परिवार पर पड़ा है। हादसे में विवेक (16) के पिता संतोष की कुछ साल पहले गंभीर बीमारी के चलते मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार को चलाने की जिम्मेदारी कम उम्र में ही विवेक के कंधे पर आ गई। परिवार में उसकी मां गायत्री देवी, छोटा भाई शिवेक (13) और बड़ी बहन संजना है। ग्रामीणों के अनुसार, विवेक करीब पांच महीने पहले बाहर से घर आया था। अब वह दोबारा कमाने के लिए परदेश जाने की तैयारी में था। बड़ी बहन संजना की शादी की जिम्मेदारी भी विवेक के कंधों पर थी। शादी की तैयारियों और खर्च के लिए वह मेहनत कर रुपये कमाने के लिए दूसरे प्रदेश जाने की तैयारी कर रहा था लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सड़क हादसे ने विवेक को परिवार से हमेशा के लिए छीन लिया।
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