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निषादों ने धरना देकर मांगा न्याय

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महराजगंज। जिला मुख्यालय पर राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के पदाधिकारियों ने बैठक के बाद धरना दिया। राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन दिया। जिलाध्यक्ष नागेन्द्र निषाद ने कहा कि सात जून 2015 को गोरखपुर के कसरवल में निषाद आरक्षण आन्दोलन के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के साथ बंद आंदोलनकारियों का मुकदमा वापस लिया जाए और रिहा किया जाए।
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इटावा क्षेत्र से अखिलेश निषाद के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से दस लाख रुपये प्रदेश सरकार दे।12 अक्टूबर 1871 में अंग्रेजों द्वारा घोषित अपराधी जाति का कलंक झेल रहे निषाद समाज को महाराष्ट्र की तरह उत्तर प्रदेश व भारत सरकार केन्द्र में विमुक्ति जनजाति का आरक्षण लागू करे।
सूची में मझवार, गौड़, तुरैहा, खरवार व बेलदार सभी समनामी जतियों को अनुसुचित जाति की सूची में अंकित किया जाए। जिला संयोजक डॉ. अनिल कुमार निषाद ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आश्वासन दिया था की मझवार की पर्यायवाची जातियों को चमार एवं धोबी पर्यायवाची जातियों की भांति अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी होगा।
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मछुआ आयोग बना कर समाज का विकास किया जाएगा। युवा जिलाध्यक्ष रामस्नेही निषाद ने कहा कि सात जून को होने वाली घटना का उच्च स्तरीय जांच करवा कर दोषी सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। रामसागर निषाद, भिखारी निषाद, बरखु निषाद, जनमंजय, किशन श्यामबिहारी, फूलकुमारी, सरोजा निषाद, सावित्री निषाद, कैलाशी निषाद रेेशमा, बबुनी, विजय लक्ष्मी आदि मौजूद रहे।
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