फरवरी की अपेक्षा मार्च में तेजी से बढ़ रहे हैं भाव
महंगाई के कारण इफ्तार की प्लेट में घट गया मेवा
महराजगंज। ईरान युद्ध के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से प्रभावित आवागमन का असर दिखने लगा है। होर्मुज मार्ग पर रुकावट के कारण न सिर्फ घरेलू गैस व पेट्रोलियम आयात प्रभावित हो रहा है बल्कि मालवाहक जहाजों के फंसने के कारण सूखे मेवा का रेट महज एक पखवाड़े के भीतर बढ़ गए हैं।
हालत यह है कि फरवरी में 900 रुपये बिकने वाला पिस्ता 1200 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है और 400 में बिकने वाली सूखी किवी का दाम 600 तक पहुंच गया है। रमजान में सूखे मेवा का उपयोग लोगों के बजट से बाहर होता जा रहा है।
18 फरवरी से रमजान व रोजे का दौर चल रहा है। रोजेदार उपवास रखकर इबादत करते हैं। ऐसे में सेहरी व इफ्तार में रोजेदार सूखा मेवा व फलों का उपयोग अधिक करते हैं जिससे भूखे रहने के दौरान उनकी उर्जा पर कोई असर न पड़े। लेकिन रमजान के शुरुआती दिनों की अपेक्षा मेवा भाव में इजाफा दर्ज हुआ है। नगर के सक्सेना चौक पर सेंवई व सूखे मेवा की दुकान लगाने वाले अजीम खान ने बताया कि सर्वाधिक बिकने वाला कीमिया खजूर 250 रुपये किलो से बढ़कर 320 रुपये किलो हो गया है। इसी तरह ईरान का छुहारा 80 रुपये किलो से बढ़कर 140 रुपये किलो तक पहुंच चुका है।
अधिकतर मेवा खाड़ी देशों के मार्फत जल मार्ग से आता, लेकिन ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण होर्मुज डमरू मध्य का रास्ता प्रभावित है। पहले की अपेक्षा गिने चुने मालवाहक जहाज ही पहुंच रहे हैं। आपूर्ति घटने के कारण रेट बढ़ाने की मजबूरी है। इसी रूट पर सूखा मेवा बिक्री करने वाले अजीमुल्ला ने बताया कि सिर्फ कीमिया खजूर व छुहारा बिक रहा। पिस्ता व अंजीर का भाव पूछकर लोग रह जा रहे। रेट बढ़ने से बिक्री घटी है।
रेटकार्ड-
मेवा - फरवरी - मार्च
पिस्ता- 900 - 1200
सूखीकीवी- 400-600
अंजीर- 1200-1600
चिंरौजी- 1200-1800
ईरानी छुहारा- 80 -140
कीमिया खजूर- 250 -320
( मूल्य रुपये प्रति किलो)