लाइसेंस के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई, लोगों को वर्तमान में नहीं मिल पा रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिला अस्पताल के ब्लड सेपरेशन यूनिट का महीनों पहले उद्घाटन हो चुका है, लेकिन अब तक इसके संचालन के लिए लाइसेंस नहीं लिया जा सका है। इसकी वजह से लोगों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के पास ही ब्लड सेपरेशन यूनिट का निर्माण कराया गया है। ब्लड सेपरेशन यूनिट तैयार है। सभी जरूरी उपकरण भी लगाए जा चुके हैं। स्टाफ भी तैनात हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार ब्लड बैंक की तरह ही ब्लड कंपोनेंट यूनिट का संचालन शुरू करने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है। लाइसेंस न मिलने से संचालन शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल प्रशासन ने आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। लाइसेंस जारी होने के साथ ही संचालन शुरू हो जाएगा, हालांकि इसका उद्घाटन पहले ही किया जा चुका है।
विभाग की ओर से लाइसेंस जारी कराने की प्रक्रिया अब की जा रही है। लखनऊ से टीम सेपरेशन यूनिट का निरीक्षण करेगी। उसकी स्वीकृति के बाद लाइसेंस जारी होगा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्दी ही लाइसेंस मिल जाएगा।
एक यूनिट खून से बच सकेगी तीन मरीजों की जान
मानव के एक यूनिट खून में तीन कंपोनेंट होते हैं। इनमें पैक्डरेड, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स शामिल हैं। कई बार मरीज को सिर्फ एक कंपोनेंट की जरूरत होती है। सेपरेशन यूनिट न होने से ब्लड बैंक से मरीज को पूरा ब्लड दे दिया जाता है। सेपरेशन यूनिट शुरू होने से मरीज की आवश्यकता के अनुसार कंपोनेंट दिया जा सकेगा और एक यूनिट खून तीन मरीजों के काम आ जाएगा।
कंपोनेंट की इन रोगियों को होती है जरूरत
सामान्य खून की कमी वाले मरीजों को पीआरबीसी, जलने के कारण गंभीर हुए मरीजों व कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत होती है। जबकि डेंगू व अन्य संक्रमण वाले मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाकर बचाया जा सकता है। वहीं क्रॉयोप्रेसीपिटेट का उपयोग हीमोफीलिया या वॉन विलेब्रांड रोग के कारण रक्तस्राव के इलाज के लिए किया जाता है।