महराजगंज। भारत नेपाल बाॅर्डर के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों फिर से नेपाल के रास्ते चीन का लहसुन आने लगा है। माना जा रहा है कि सहालग को देखते हुए धंधेबाज लहसुन की तस्करी कर इकट्ठा करने में जुट गए हैं। एक क्षेत्र से रोजाना 8 से 10 पिकअप लहसुन आने की बात कही जा रही है।
भारत नेपाल बॉर्डर के सीमावर्ती इलाकों से पुलिस टीम सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार तस्करी का चीन का लहसुन बरामद कर रही है, लेकिन खुली सीमा के चलते अधिकांश धंधेबाज अपने मकसद में सफल हो जा रहे हैं। मंगलवार को निचलौल मंडी परिसर में बैठ चर्चा कर रहे कुछ व्यापारियों ने कहा कि चीन का लहसुन चमकदार होता है। इसके चलते धंधेबाजों को अच्छी आमदनी होती है, क्योंकि बाजार में चमकदार और बड़े दाने वाले लहसुन की डिमांड ज्यादा रहती है।
देसी की अपेक्षा चीन का लहसुन जल्दी बिक जाता है। लहसुन का कारोबार ज्यादातर सीमावर्ती इलाकों से होता है। धंधेबाज नेपाल से तस्करी कर चीन का लहसुन डंप कर लेते हैं। फिर व्यापारियों के वहां सप्लाई कर देते हैं। कुछ धंधेबाज तो ऑनलाइन मंडी गेट पास कटाकर गोरखपुर, बिहार और दिल्ली तक की बड़ी मंडियों में चीन का लहसुन भेज देते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, चीन के लहसुन का मूल्य नेपाल में 80 से 100 रुपये प्रति किलो है, जबकि भारतीय क्षेत्र में देसी लहसुन की कीमत करीब 260 से 320 रुपये प्रति किलो है। ऐसे में धंधेबाज बाॅर्डर पर चीन के लहसुन की तस्करी कर सहालग में मोटी रकम कमाने के जुगाड़ में जुटे हैं। फिलहाल सीमावर्ती इलाकों में पुलिस इन धंधेबाजों को चिह्नित कर कार्रवाई में जुटी हुई है।
भारतीय बाजारों में बिकने वाले देसी लहसुन में भी चीन के लहसुन की मिलावट की जा रही है। वहीं लोगों को यह पता भी नहीं है कि वे देसी लहसुन खा रहे हैं कि चीन का। हालांकि जहां देसी लहसुन लोगों के सेहत के लिए फायदेमंद है। वहीं चीन का लहसुन नुकसानदायक है। ल