हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शालिग्राम के कारण ही कालीगंडकी को ही एक पवित्र नदी माना जाता है। एक किंवदंती यह भी है कि कालीगंडकी के तट पर बेनी-गलेश्वर क्षेत्र में ऋषि पुलह, कपिल और जड़भरत ने तपस्या करके सिद्धि प्राप्त की थी। पुलाश्रम को सांख्यदर्शन के महामुनि कपिल का निवास स्थान भी माना जाता है।
पर्यटन को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा
पाषाण अध्ययन, उत्खनन के सदस्य कुलराज चालिसे ने कहा कि यह क्षेत्र एक पवित्र भूमि है, इसलिए हम यहां कालीगंडकी नदी के निरंतर प्रवाह से पवित्र पत्थरों को निकालकर राम मंदिर अयोध्या पहुंचाएंगे। फिलहाल पत्थर को जनकपुर के रामजानकी मंदिर में रखा जाएगा। फिर सही समय पर अयोध्या में राम मंदिर पहुंचाया जाएगा। शिला लेने के लिए गुरु राजेंद्र सिंह पंकज अयोध्या से पोखरा पहुंचे हैं।
चालिसे ने कहा कि चूंकि यह नेपाल की देन है, इसलिए चट्टान को खोदकर अयोध्या तक पहुंचाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में आकर्षण का केंद्र श्रीराम की मूर्ति बनाने के लिए पत्थर पहुंचेगा। यह अयोध्या, जनकपुर और मुक्तिनाथ के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा। पत्थर देने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।