महराजगंज/निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत वन क्षेत्रों में इन दिनों जंगली सुअरों का शिकार किया जा रहा है। बीते दिन पकड़ी क्षेत्र के जंगली सूअर का मांस बरामद हुआ था। पहले भी निचलौल और मधवलिया वन क्षेत्र के जंगल में सूअर का मांस बरामद हो चुका है। इन दोनों वन क्षेत्र में शिकारियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। हालांकि जिम्मेदारों का दावा है कि सख्त कार्रवाई की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल, मधवलिया, चौक, लक्ष्मीपुर, पकड़ी, शिवपुर सहित अन्य वन क्षेत्र जंगली जानवरों के साथ ही बहुमूल्य वन संपदाओं से भरा हुआ है। विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण लकड़ी तस्कर और खनन माफियाओं के साथ ही वन्य जीवों के शिकारी भी सक्रिय रहते हैं। बीते दिनों हुई वारदातों पर नजर डाले तो पता चलेगा कि लकड़ी कटान, अवैध खनन के साथ ही सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के जंगलों में सुअर के मांस की तस्करी भी बढ़ चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, पकड़ी वन रेंज के जंगल में तस्कर काफी समय से सुअरों का शिकार कर रहे हैं। आरोपी जंगली सूअरों का शिकार करने के बाद झाड़ियों के बीच मांस को काट लेते थे। फिर मांस को झोले में लेकर गांव की आबादी में 400 से 500 रुपये प्रतिकिलो की दर से बेच देते हैं। इतना ही नहीं शिकारियों के गिरोह का नेटवर्क भारत-नेपाल बार्डर से सटे गांव से लेकर कुशीनगर जिले तक फैला हुआ है।
कई बार पकड़े जा चुके हैं तस्कर
वन विभाग की कार्रवाई के मुताबिक 30 अक्तूबर 2025 को सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत पकड़ी वन रेंज के जंगल में जंगली सुअर का मांस बरामद हुआ था। 13 मार्च 2025 को निचलौल के चरगहां वीट मदनपुर कंपार्ट संख्या एक के गैनही जंगल में कुछ शिकारी जंगली सुअर का शिकार कर झाड़ियों के बीच काट रहे थे। वन कर्मियों की टीम दो शिकारियों को गिरफ्तार भी कर लिया था। जबकि सात अन्य आरोपी भागने में सफल रहे। गिरफ्तार दोनों आरोपी कुशीनगर जिले के हैं। 3 फरवरी 2024 को निचलौल के भारत-नेपाल बार्डर के करीब पिकअप से नेपाल भेजे जा रहे 6 सूअरों के शव को वन विभाग की टीम ने बरामद किया था। वन विभाग की टीम मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। दोनों आरोपी महराजगंज नगर पालिका क्षेत्र के हैं। 24 नवंबर 2023 को मधवलिया के सिहाभार गांव में कुछ शिकारी जंगली सुअर का शिकार करने के बाद मांस पका रहे थे। वन विभाग ने छापा मार कर मांस बरामद कर लिया था और आरोपी भाग गए थे। वन विभाग की टीम बरामद मांस को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर ली थी।
सूअर की बजाए फंस जाते हैं तेंदुए
जंगल से सटे गांव के सुबास, कमलेश, राजन, विनोद व अन्य ने बताया कि जंगली सूअरों का शिकार करने के लिए शिकारियों द्वारा लगाए गए जाल और जंजीर में कई बार तेंदुए भी फंस जाते हैं। वन कर्मियों की सक्रियता से फंसे तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर जान बचा लिया जाता है। 7 नवंबर 2020 को निचलौल के करमहिया और गुलरभार गांव के बीच स्थित गंडक पुल के नीचे बेंत की झाड़ी में शिकारियों द्वारा बिछाए गए जंजीर में एक तेंदुआ फंस गया था। नौ घंटे कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला गया था। 8 फरवरी 2020 को निचलौल रेंज अंतर्गत कलनही गांव से सटे गंडक नदी के रेता में तस्करों ने शिकार के लिए फंदा बिछा रखा था। एक तेंदुए का पैर शिकारियों की जंजीर में फंसकर काफी चोटिल हो गया था। वनकर्मियों की टीम ने करीब पांच घंटे मशक्कत कर तेंदुए को रेस्क्यू कर इलाज के लिए गोरखपुर भेजा था।
सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के जंगलों में अवैध शिकार की रोकथाम को लेकर वन विभाग सख्त हो गया है। सभी रेंजरों को रात्रि गश्त तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। जंगली सूअर का शिकार करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर चालान किया गया है। जबकि शेष तीन आरोपियों की पहचान कर ली गई है। उन्हें पकड़ने के लिए विभाग की टीम लगातार दबिश दे रही है। आरोपियों के घरों पर न्यायालय से नोटिस भेजे जाने की तैयारी की जा रही है।
-निरंजन सुर्वे, डीएफओ, सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग