रंग पड़ने से आंखों जलन, लालिमा और एलर्जी के पहुंचे मरीज
बृृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में पहुंचे करीब 50 मरीज
आंखों में जलन, लालिमा, एलर्जी से पीड़ित थे ज्यादातर मरीज
महराजगंज। होली के रंगों की मस्ती खत्म होने के बाद जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। बृहस्पतिवार को जिला अस्प्ताल में नेत्र रोगियों की भीड़ उमड़ पड़ी। इनमें से अधिकांश मरीज होली के दौरान आंखों में रंग पड़ने से परेशानी महसूस कर रहे थे। ज्यादातर मरीज आंखों में जलन, लालिमा, एलर्जी से पीड़ित थे।
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. निरंजन सिंह ने बताया कि ओपीडी में बृहस्पतिवार को करीब 50 मरीज पहुंचे। इनमें ज्यादातर मामलों में होली के केमिकल युक्त रंगों के कारण आंखों में एलर्जी, रंग चढ़ना, जलन और धूल कणों के जमाव की शिकायतें थीं। डॉ. निरंजन सिंह ने कहा कि होली के बाद ऐसे मामले आम हैं क्योंकि बाजार में उपलब्ध कई रंगों में हानिकारक रसायन मिले होते हैं। यह आंखों की नाजुक सतह को प्रभावित करते हैं। इससे कॉर्निया में जलन, लालिमा और कभी-कभी संक्रमण तक हो सकता है। उन्होंने बताया कि होली से पहले ऐसे मरीजों की संख्या 15 से 20 के आसपास होती थी।
डॉक्टरों के अनुसार, होली खेलते समय प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल कम होता है और ज्यादातर लोग केमिकल आधारित रंगों का सहारा लेते हैं। यह केमिकल युक्त कलर आंखों के लिए खतरनाक साबित होते हैं। कई मरीजों ने बताया कि होली के दिन रंग खेलते समय आंखों में रंग चला गया। इसके बाद घरेलू उपाय करने के बावजूद समस्या बढ़ गई। कुछ लोगों ने आंखों में रगड़ने की गलती की जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
डॉ. निरंजन सिंह ने बचाव के तरीके बताते हुए कहा कि सबसे पहले आंखों में रंग या गुलाल जाने पर तुरंत साफ करें। सामान्य तापमान वाले पानी से लगातार 10-15 मिनट तक अच्छी तरह धुलाई करें। आंखों को कभी रगड़ें नहीं क्योंकि इससे कॉर्निया को खरोंच लग सकती है। यदि धुलाई के बाद भी जलन, लालिमा, पानी आना या धुंधला दिखना जारी रहे तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई आई ड्रॉप, गुलाबजल या घरेलू नुस्खे न अपनाएं, क्योंकि ये समस्या को बढ़ा सकते हैं।