महराजगंज। कुत्तों के काटने के बढ़ती घटनाओं से लोग काफी खौफ में हैं। आवारा कुत्तों का आतंक दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। पार्क, अस्पताल, कार्यालय, सड़क व गलियों तक में कुत्तों के अचानक हमलों से लोग परेशान हैं। लोगों का घर से निकलना और घूमना दूभर हो गया है। एक अनुमान के अनुसार शहर में करीब तीन हजार कुत्ते हैं। एक जनवरी से लेकर जुलाई तक 18,720 लोगों को कुत्ते और बंदरों ने काटकर घायल किया है। 15,726 लोगों को एआरवी का इंजेक्शन लगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कुत्तों को भोजन देने के लिए विशेष स्थान बनाए जाएं। कुत्तों को खुले में खिलाने पर भी रोक लगाई है और आक्रामक कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने के लिए कहा है। लोगों ने इस फैसले का लोगों ने स्वागत किया है। कुत्तों के आतंक को कम करने की जिम्मेदारों ने कोई तैयारी नहीं की गई है। जिला अस्पताल के सुई कक्ष में चीफ फार्मासिस्ट शैलेष मिश्रा ने बताया कि प्रत्येक दिन 10 से 12 पीड़ितों को एआरवी लगाई जा रही है।
पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबिज वैनम उपलब्ध है। शनिवार को पकड़ी गांव के विपुल, बलुआ गांव के फेमस, मटिहनिया गांव के अर्थव को सुई लगी। रूधौली भावचक के अर्जुन को एआर लगाया गया। जिला अस्पताल में मई से अब तक 600 लोगों ने एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाए हैं।
शहर में इफको किसान सेवा केंद्र जाने वाले रोड सहित कई जगहों पर कुत्तों का झुंड रहता है। ये कुत्ते अचानक हमला कर देते हैं। लोगों के मुताबिक नगर पालिका क्षेत्र में कुत्तों से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता दशरथ गुप्ता कहते हैं कि एक स्थान पर इनको खाने की व्यवस्था रहेगी तो बचाव भी हो सकेगा। कभी-कभी तो कुत्ते सड़क पर खाने के लिए झगड़ते हुए लोगों को काट लेते हैं।
भोजन और पानी की कमी के चलते आक्रामक हो रहे कुत्ते : गर्मी के मौसम में भोजन और पानी की कमी के चलते कुत्ते और बंदर आक्रामक हो रहे हैं। यही कारण है कि एआरवी लगवाने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। कुत्तों के काटने से पीड़ितों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 4,151 लोगों को इंजेक्शन की चारों डोज लगाई जा चुकी हैं।