खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनीर व ग्रेवी का एक-एक नमूना जांच के लिए भेजा था प्रयोगशाला में
पनीर के इस पहले भी कई नमूने आ चुके हैं असुरक्षित
गोरखपुर। होटलों में सब्जी और पनीर आदि की ग्रेवी बनाने के लिए उसमें केमिकल का प्रयोग हो रहा है। बिछिया के एक रेस्टोरेंट से लिए गए ग्रेवी के नमूने में मैटेलिक येलो नाम का केमिकल पाया गया है। आमतौर पर यह केमिकल पीले रंग के पेंट में मिलता है। इसके अलावा एक डेयरी से लिया गया पनीर का नमूना भी फेल है। जांच में इस पनीर को खाने के लिए असुरक्षित पाया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोनों मामलों में संबंधित दुकानों को नोटिस जारी किया है। उनका पक्ष सुनने के बाद विधिक कार्रवाई शुरू होगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की प्रवर्तन टीम ने कुछ दिन पहले श्री अमृत डेयरी से पनीर और शार्प फूड रेस्टोरेंट, बिछिया से ग्रेवी का नमूना लिया था। नमूना राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि यह पनीर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 एवं विनियम 2011 के अनुरूप नहीं है और इसे उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया। ग्रेवी में मैटेलिक येलो नामक कृत्रिम रंग की मौजूदगी पाई गई। यह रंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है और किसी भी खाद्य पदार्थ में इसके उपयोग पर रोक है। इस कारण ग्रेवी को भी असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ विधिक कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। उन्होंने आम उपभोक्ताओं से अपील की कि वे बाजार से खाद्य पदार्थ खरीदते समय सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध खाद्य सामग्री की सूचना विभाग को दें।
पहले भी फेल हो चुके हैं पनीर के नमूने
जिले में मिलावटी पनीर बनाने का धंधा गहराई तक जड़ जमा चुका है। इससे पहले भी कई बार पनीर के नमूने फेल हुए हैं। पिछले दिनों पिपराइच में केमिकल व मिल्क पाउडर के इस्तेमाल से तैयार कृत्रिम दूध से पनीर बनाने की फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ था। इसके अलावा खजनी इलाके में भी मिलावटी पनीर पकड़ी जा चुकी है। शहर के शाहपुर समेत कई इलाकों में मिलावटी पनीर पकड़ी जा चुकी है।
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पाचन तंत्र पर पड़ता है प्रतिकूल प्रभाव
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मैटेलिक येलो जैसे कृत्रिम रंग शरीर के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। इनके लंबे समय तक सेवन से लिवर, किडनी और पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, असुरक्षित पनीर का सेवन फूड पॉयजनिंग, दस्त, उल्टी और संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए बाजार से दुग्ध उत्पाद और तैयार भोजन खरीदते समय ब्रांड, पैकिंग और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।