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हल्दी की खेती करने वालों के आए अच्छे दिन

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हल्दी की खेती से खरपतवार को निकालते किसान पारस। - फोटो : MAHARAJGANJ
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हल्दी की खेती करने वालों के आए अच्छे दिन
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महराजगंज। एक समय था जब जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों का नाम आते ही लोगों के जेहन में गन्ने की खेती नजर आने लगती थी। अब ऐसा नहीं है, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों का तस्वीर बदलने लगी है। भारत-नेपाल सीमा से लगे जिले के सीमावर्ती क्षेत्र खेती के लिए मशहूर है। चाहे वह सब्जी, मेंथा, गेहूं, धान की खेती हो या केला की। यहां के किसान हल्दी की खेती में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
जिला मुख्यालय से 48 किमी दूर बैदौली निवासी किसान पारस भी हल्दी की खेती करने में पीछे नहीं है। वह पुश्तैनी खेती छोड़ हल्दी की खेती पर जोर दे रहे हैं। उन्हें हर वर्ष लाखों रुपये का फायदा हो रहा है। इस समय दो एकड़ भूमि में हल्दी की खेती कर रहे हैं। हल्दी की खेती आठ से नौ महीनों की होती है। लागत भी कम लगती है और मुनाफा ज्यादा होता है। मिश्रवलिया निवासी किसान अताउल्लाह बताते हैं कि हल्दी की खेती गांव में पिछले दो-तीन वर्षों से शुरू हुई है। हल्दी की खेती से गांव के कुछ किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। बैठवलिया निवासी किसान रामबचन ने कहा कि गांव के बड़े किसानों द्वारा हल्दी की खेती करने को लेकर प्रोत्साहित किया जाता है। वर्तमान में वह एक एकड़ खेत में हल्दी की खेती कर रहे हैं।
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ऐसे होती है हल्दी की खेती
कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर गोंडा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामलखन सिंह ने बताया कि हल्दी की बुआई का समय अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक की जाती है। प्रति हेक्टेयर में 15 से 20 क्विंटल बीज लगते हैं। प्रति हेक्टेयर में 200 से 250 क्विंटल की पैदावार होती है। पेड़ से पेड़ की दूरी एक फीट होनी चाहिए। अच्छी उपज के लिए जुलाई से पूर्व प्रति हेक्टेयर 250-300 क्विंटल गोबर की खाद और 20 किग्रा मिधाइल जुताई के समय भूमि में डालकर अच्छी तरह मिला दिया जाता है।
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जिले में बढ़ रहस है हल्दी का रकवा
प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी विकास श्रीनेत ने कहा कि जिले के निचलौल, सिसवा, नौतनवां, सदर, बृजमनगंज, लक्ष्मीपुर, पनियरा विकास खंड क्षेत्रों में करीब 400 हेक्टेयर भूमि पर हल्दी की खेती की जा रही है। दिस वर्ष पहले किसान देशी हल्दी लगाते थे, जिसकी पैदावार कम थी। उसके बाद विभाग द्वारा राजेंद्रा सोनिया प्रजाति की बीज का निशुल्क वितरण किया गया, जिसकी पैदावार अच्छी होने लगी। विभाग की ओर से 10 हेक्टेयर भूमि पर हल्दी की खेती करने वाले किसानों को प्रति 12 हजार रुपये अनुदान मिलता है। हल्दी की अमलापुरम, कस्तूरीपास्यु मधुकर कृष्णा, सुगंधम सुगना, सुदर्शन अच्छी प्रजातियां हैं।
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