महराजगंज। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति किसानों की सुस्ती नुकसान साबित हो सकती है। अभी तक 4856 किसानों ने ही फसल बीमा कराया है, जबकि 31 दिसंबर तक फसल बीमा की समय सीमा दी गई है। समय सीमा के अंदर जो किसान फसल बीमा नहीं कराएंगे वे लाभ पाने से वंचित हो जाएंगे।
भारतीय कृषि बीमा कंपनी के डिस्ट्रिक मैनेजर अमित कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आज की जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। गाइडलाइन में भारत सरकार ने संशोधन किया है। लाभ पाने के लिए किसानों को 31 दिसंबर तक फसलों का बीमा कराने का समय है। प्राकृतिक आपदाओं तथा बाढ़,रोग,कीटों, भूस्खलन, ओलावृष्टि अथवा रोके न जा सकने वाले कारकों से होने वाले नुकसान पर अधिसूचित क्षेत्रों की अधिसूचित फसलों के बीमित किसानों को क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है। हालांकि अब इस योजना को ऐच्छिक कर दी गई है, इच्छुक गैर ऋणी किसान अपनी खतौनी, आधार कार्ड के साथ बीमित फसल के क्षेत्रफल का घोषणा पत्र भरकर नजदीकी ग्राहक सेवा केंद्र से मात्र डेढ़ प्रतिशत प्रीमियम पर 31 दिसंबर तक बीमा करा सकते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड धारक ऋणी कृषक यदि अपनी फसलों का बीमा नहीं कराना चाहते हैं, तो 24 दिसंबर तक संबंधित बैंकों में बीमा न कराने का आवेदन प्रस्तुत कर दें। अन्यथा बैंक स्वतः उनका प्रीमियम काट करके उनको योजना से लाभान्वित कर देगी। इन्होंने कहा कि जिले में चार फसल नोटिफ़ाएड है। जिसमें गेंहू,लाही-सारसो,मंसूर और आलू की फसल शामिल है। जिसमे एक हेक्टेयर गेहूं की फसल की बीमित 80800 राशि रुपये है। किसान को बीमा करने के लिए 1.5 फीसदी प्रीमियम राशि 1212 रुपये प्रति हेक्टर की दर देना होगा। लाही-सारसों की फसल पर 59300 बीमित राशि का 1.5 फीसदी 889.50 रुपये है। जबकि मसूर पर 681 रुपये व आलू फसल का 5 फीसदी बीमित राशि 185000 का किसानों को देय होगा। बीते वर्ष रबी 2022-23 मे 4351 किसानों को लगभग 1.68 करोड़ राशि फसल के नुकसान के रूप लाभ दिया गया है।