महराजगंज। नियम कानून का पेच कसा तो पंजीकृत अस्पतालों की संख्या घट गई। पिछले साल जहां 120 अस्पताल पंजीकृत थे। अब घटकर 81 हो गए हैं। पंजीकरण में तमाम ऐसे प्रपत्रों को देना है, जिससे फर्जीवाड़ा कर पाना मुश्किल है।
पोर्टल पर एक बार क्लिक करते ही अस्पताल समेत डॉक्टर का पूरा विवरण उपलब्ध हो जाएगा। अब एक डॉक्टर पूरे समय एक ही अस्पताल पर पंजीकृत रह सकता है। जानकारी के अनुसार, जिले में बीते साल 120 अस्पताल, 12 क्लीनिक, 103 पैथोलाॅजी, 58 अल्ट्रासाउंड और 34 एक्सरे पंजीकृत थे। अब इनकी संख्या कम हो गई है। नियम कानून में बदलाव होने के बाद इसका असर भी दिखने लगा है।
अब तो अस्पताल या लैब के पंजीकरण के दौरान संबंधित डॉक्टर के शपथपत्र के साथ ही सीएमओ कार्यालय में बुलाकर हस्ताक्षर करते हुए तस्वीर भी ली जा रही है। इससे डॉक्टर को भी अब यह कहने का मौका नहीं मिलेगा की पंजीकरण के बारे में उन्हे जानकारी नहीं है। इसी तरह से सभी जरूरी प्रपत्र भरवाए जा रहे हैं।
50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों पर क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट लागू किया गया था। अब 50 से कम बेड वाले अस्पतालों को भी इस एक्ट के सभी नियमों का पालन करना होगा। उन्हें क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पताल का पंजीकरण कराना होगा। अस्पताल के बाहर डिस्प्ले बोर्ड लगाना होगा, जिस पर पंजीकरण नंबर, संचालक का नाम, कार्यरत डॉक्टर व स्टाफ नर्स का नाम व पंजीयन नंबर, बेड संख्या, अस्पताल में उपलब्ध सभी तरह की सुविधाएं आदि लिखना होगा।
बोर्ड का बैकग्राउंड पीला एवं काले रंग से हिंदी अक्षर में होगा। यह बोर्ड अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टर ऑनकॉल सेवा भी एक दिन एक ही जिले में दे पाएंगे। पोर्टल पर ऑनकॉल विशेषज्ञों के लिए भी सख्ती की गई है।