गुड़ गोदाम की जमीन पर विवाह भवन और दुकानों के निर्माण पर कोर्ट ने नहीं दिया स्थगनादेश
सिसवा बाजार। नगर पालिका अंतर्गत गुड़ गोदाम की विवादित जमीन पर विवाह भवन और दुकानों के निर्माण के विवाद में पूर्व मंत्री शिवेंद्र सिंह के पक्ष को अदालत से झटका लगा है। अदालत ने नगर पालिका परिषद की ओर से जा रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
जानकारी के अनुसार सिविल जज प्रवर खंड/एफटीसी, महराजगंज की अदालत ने वादीगण की ओर से दाखिल अस्थायी निषेधाज्ञा प्रार्थनापत्र 62 को निरस्त कर दिया। अदालत ने अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद स्पष्ट किया कि वादीगण के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं हो रहा है। यह मामला शिवेंद्र सिंह आदि बनाम नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार से जुड़ा है।
वादी शिवेंद्र सिंह, मानवेंद्र सिंह तथा अन्य की ओर से नगर पालिका परिषद के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दाखिल किया गया था। वादी पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि विवादित गुड़ गोदाम की संपत्ति पर उनका स्वामित्व और कब्जा है। आरोप लगाया गया कि प्रतिवादी पक्ष उनकी संपत्ति में हस्तक्षेप करते हुए निर्माण और तोड़फोड़ करना चाहता है। इसी आधार पर नगर पालिका और अन्य प्रतिवादियों को निर्माण कार्य में हस्तक्षेप करने से रोकने के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग की गई थी।
अदालत ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों का अवलोकन कर आदेश में कहा कि विवादित आराजी संख्या 576, रकबा 0.5100 हेक्टेयर से संबंधित है। उपलब्ध राजस्व अभिलेखों में जमीन गुड़ गोदाम, कानपुर के नाम से दर्ज पाई गई और वादीगण का नाम संबंधित अभिलेखों में दर्ज नहीं मिला। अदालत ने राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्रविष्टियों और उनके कानूनी प्रभाव पर भी विचार किया। न्यायालय के अनुसार, केवल मौखिक दावे या कब्जे का कथन अंतरिम निषेधाज्ञा देने के लिए पर्याप्त नहीं है बल्कि वादी को अपने पक्ष में प्रथम दृष्टया अधिकार स्थापित करना आवश्यक है।
अदालत ने पत्रावली को जांच के लिए 13 अक्टूबर 2026 को पेश करने का आदेश दिया है। नगर पालिका परिषद की ओर से जा रहे निर्माण कार्य के खिलाफ मांगी गई अंतरिम रोक अदालत ने नहीं दी है। हालांकि यह आदेश केवल अस्थायी निषेधाज्ञा के आवेदन पर है। विवादित संपत्ति के अंतिम स्वामित्व और मूल वाद के अधिकारों का फैसला आगे होने वाले विचारण और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।