निचलौल। क्षेत्र के बजही गांव स्थित पीएचसी परिसर और आबादी के इर्द-गिर्द विचरण करने वाले तेंदुए की तलाश में वन कर्मियों की टीम शनिवार को लगी रही। वन कर्मी अस्पताल में पदचिह्नों की पहचान कर ग्रामीणों से जानकारी ली।
वन कर्मियों की सतर्कता के बाद भी ग्रामीण और स्वास्थ्य कर्मियों की नींद उड़ गई है। ग्रामीण सुरेश, भोलू, मंजेश, पहाड़ी, मेराज आदि ने बातचीत के दौरान बताया कि गांव निचलौल वन रेंज से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है। इतना ही नहीं गांव और जंगल के बीच पड़ने वाले सिवान में इन दिनों गन्ने की फसल खड़ी है। ऐसे में तेंदुआ एक फरवरी को पहली बार आबादी के इर्द-गिर्द विचरण करते हुए दिखाई दिया था।
फिर तेंदुआ दो फरवरी की रात में आबादी के एक किनारे स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में घुस गया था। जहां पर शिकार की तलाश में तेंदुआ करीब चार घंटे तक बैठा रहा। उसके बाद तीन फरवरी को तेंदुआ अस्पताल के चहारदीवारी और आबादी के इर्द-गिर्द विचरण करता रहा। इस दौरान लोगों की सजगता और वन कर्मियों की सतर्कता के चलते चार फरवरी को तेंदुआ पुनः जंगल की ओर लौट गया। इसके चलते तेंदुआ पांच फरवरी को कही नहीं दिखा।
छह फरवरी की रात को एक बार फिर से शिकार की तलाश में तेंदुआ अस्पताल परिसर में घुस आया। तेंदुआ कुछ देर अस्पताल परिसर में विचरण करने के बाद बाहर निकल आबादी के इर्द-गिर्द विचरण करने लगा। वहीं अस्पताल पर तैनात एएनएम रश्मि सिंह और मंजू मौर्या ने कहा कि अस्पताल परिसर में लगातार तेंदुआ आने से अब उन लोगों को काफी डर सताने लगा है।
निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने कहा कि अस्पताल परिसर में एक बार फिर से तेंदुए को घुसने की सूचना पर मौके पर पहुंच पदचिह्नों की पहचान की गई।