महराजगंज। पिपरा रसूलपुर निवासी रामू मौर्य के साथ 5 नवंबर 2024 को साइबर ठगों ने करीब 82,000 पये की ऑनलाइन ठगी की थी। ठगी के बावजूद स्थानीय साइबर क्राइम सेल उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने से लगातार इनकार करता रहा। मजबूरन पीड़ित को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। आखिरकार 20 नवंबर 2025 को न्यायालय ने थाना कोतवाली सदर को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
रामू मौर्य ने अपने आवेदन में बताया कि उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रुपे प्लेटिनम क्रेडिट कार्ड से 5 नवंबर 2024 को अलग-अलग समय पर 40,944 रुपये, 38,896 रुपये, 1,228 रुपये (दो बार) और 51 रुपये कुल मिलाकर 82,347 रुपये की फर्जी ट्रांजेक्शन कर ठगों ने उड़ा लिए। घटना के तुरंत बाद उन्होंने 12 दिसंबर 2024 को साइबर क्राइम सेल में शिकायत की। लेकिन तैनात कर्मचारियों ने पहले जांच का हवाला देकर मामले को टाला और बाद में सितंबर 2025 में फोन पर साफ कह दिया कि आपकी दी गई जानकारी गलत है, आपके खाते से कोई पैसा नहीं गया है इसलिए प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकती।
मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान रामू मौर्य ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से की। उन्होंने 26 सितंबर 2025 को सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना-पत्र दाखिल किया। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 20 नवंबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज दर्ज कराने का आदेश दिया।