भूमि के मामलों के निस्तारण के लिए प्रचलित 39 अधिनियम राज्य सरकार ने जनहित में समाप्त कर दिया है। बृहस्पतिवार को डीएम सुनील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पूर्व में तहसीलदार को जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं था। अब वे भी जुर्माना लगा सकेंगे। राजस्व विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इसके अनुसार पालन कराएं।
डीएम ने कहा कि राजस्व संहिता 2015 में नए प्रावधानों के अनुसार 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक को अब वसूली के मामले में लॉकअप में बंद नहीं करेंगे। यह संशोधित अधिनियम 11 फरवरी 2016 से लागू हो जाएगा। इसका विस्तृत प्रशिक्षण गोरखपुर के एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. चन्द्र भूषण त्रिपाठी ने दिया।
इस कार्यशाला में कई अधिकारी मौजूद रहे। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि जो 39 अधिनियम समाप्त किए गए हैं। उसमें वे भी हैं, जो उत्तराखंड क्षेत्र से हैं और अब राज्य बन जाने के बाद उनका उत्तर प्रदेश में लागू नहीं किया जा रहा था। वर्तमान अधिनियम के तहत सीमा विवाद तथा सार्वजनिक भूमि का विवाद निपटारा करना सरल हो गया है।
चकरोड के विवाद में काश्तकार को स्वयं अपने खर्चे पर ठीक कराना होगा। अनुसूचित जाति का व्यक्ति बिना डीएम की अनुमति से गैर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को अपनी भूमि नहीं बेंच सकेगा। सवा तीन एकड़ की सीलिंग का नियम भी लागू होगा।
नक्शा, खसरा, खतौनी में संशोधन के लिए अब तहसीलदार कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया जा सकेगा। पूर्व में यह डीएम कोर्ट में दायर होता था। प्रशिक्षण में उन्होंने बताया कि भूमि विवाद निपटारा संबंधी इस संहिता में कुल 234 धाराएं दी गयी हैं। इसका भली भांति अध्ययन कर ले तथा लागू करें।