मिठौरा। रेशम विभाग व केंद्रीय रेशम बोर्ड के तत्वावधान में रेशम केंद्र, हरिहरपुर में पांच दिवसीय कार्यशाला में किसानों को रेशम कीट पालन का किसानों को जिलास्तरीय प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का आयोजन मुख्यमंत्री रेशम विकास योजनांतर्गत किया गया। प्रशिक्षण में किसानों को रेशम कीट पालन, कीट रोग और प्रबंधन के बारे में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने प्रशिक्षित किया।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन शनिवार को किसानों को रेशम कीट पालन और इससे जुड़ी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई। सहायक रेशम निदेशक समर बहादुर सिंह ने किसानों को रेशम कीटों से संबंधित बीमारियों, कीट संक्रमण और उनके प्रबंधन के उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि रेशम कीटों में फैलने वाले सामान्य रोगों जैसे ग्रॉसेरी फ्लाचरी, मस्कार्डिन आदि हैं।
उन्होंने इनके लक्षणों, कारणों की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक तरीकों पर प्रकाश डाला। केंद्रीय रेशम वैज्ञानिक डॉ. जटा शंकर सिंह ने किसानों के साथ रेशम कीट पालन से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी साझा की, जिसमें रेशम कीट के जीवन चक्र, रेशम उत्पादन और शहतूत पौधों के विषय में किसानों को विस्तार से बताया। पूर्व निरीक्षक रेशम विद्याधर पांडेय ने प्रशिक्षण देते हुए कहा कि रेशम कीट पालन एक नकदी फसल है। किसान इससे अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। इस अवसर पर डॉ. शिव पूजन यादव, शैलेंद्र पटेल, मानवेंद्र सिंह, विक्रम मौर्य, रवी शंकर गुप्ता आदि लोग उपस्थित रहे।