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पराली को लेकर जिले में पिछड़ रही खेती, किसान परेशान

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महराजगंज में कई खातों में पड़ी हुई परारी। - फोटो : MAHARAJGANJ
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पराली को लेकर किसान चिंतित, पिछड़ रही जिले में खेती
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महराजगंज। खेत में पराली जलाने को लेकर सरकार सख्त है, लेकिन संसाधनों से जूझते किसानों को पिछड़ रही खेती को लेकर चिंता सता रही है। खेत में पड़ी धान की फसल यदि किसी तरह कटवा ली भी तो पराली जी का जंजाल बन रही है। जुर्माने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। एक तरफ रवी की खेती पिछड़ रही है, वहीं दूसरी ओर से खेत से नमी भी अब धीरे धीरे कम हो रही है। जुर्माने व मुकदमें के डर से न तो किसान अपनी फसल कंबाइन से कटवा रहा है और न ही साधारण कंबाइन रखने वाले धान की कटाई करने की हिम्मत कर रहे हैं।
कृषि विभाग ने जिले में 1.68 लाख हेक्टेयर में रवी की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित कर खाद, बीज व पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कर करा है। खेत में पराली जलाने की मनाही पर अभी तक करीब 60 प्रतिशत फसल खेतों में पड़ी है। सरकार के इस फरमान कि खेतों में पराली नहीं जलाए को लेकर प्रशासन कड़ाई से पालन करा रहा है। हरखा गांव के किसान श्रवण चौधरी, गगन पांडेय ने बताया कि हाथ से कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के कारण खेत की कटाई में परेशानी हो रही है। बिना रिपर वाले कंबाइन कटाई नहीं करने आ रहे हैं। रिपर वाले कंबाइन की संख्या कम है। गेहूं की बुवाई पिछड़ रही है। ऐसे में क्या किया जाए कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
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जिला कृषि अधिकारी हिमांचल सोनकर ने बताया कि जिले में गेहूं के बीज की उपलब्धता 5776 क्विंटल है। 1487 एमटी यूरिया, डीएपी 16690 एमटी, एनपीके 3221 एमटी उपलब्ध है। किसान खेत में पराली न जलाएं, उसे रिपर से कटवा दें जिससे खेत की जुताई आसान हो जाएगी। शासन की ओर से किसानों की सुविधा के लिए खाद बीज पर्याप्त उपलब्ध है।
268 किसानों पर 6.37 लाख जुर्माना
महराजगंज। खेत में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन सख्त है। अपर जिलाधिकारी कुंज बिहारी अग्रवाल ने बताया कि अभी तक खेत में पराली जलाने वाले 268 किसानों के विरुद्ध कार्रवाई हो चुकी है। जबकि छह कंबाइन सीज किए जा चुके हैं। इन सभी किसानों पर 6.37 लाख का जुर्माना लगाया गया है। जिसमें से 15 किसानों ने 37500 रुपये जमा भी कर दिया है। वहीं 23 किसानों पर प्रदूषण अधिनियम के तहत केस भी दर्ज हो चुका है।
खेत में पराली जलाने से नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पराली जलाने से मित्र किट मर जाते हैं। खेत की उर्बरा शक्ति का क्षरण होने के साथ ही पर्यावरण प्रदूषित होता है। वहीं, पशुओं के चारे की समस्या भी बढ़ जाती है।
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हैप्पी सीड एक ऐसी ही मशीन है, जिसे ट्रैक्टर पर लगाकर गेहूं की बुवाई की जाती है। गेहूं की बुवाई से पहले कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई के बाद बचे पुआल को इसके लिए हटाने की जरूरत नहीं पड़ती। परंपरागत बुवाई के तरीकों की तुलना में हैप्पी सीडर के उपयोग से 20 प्रतिशत अधिक लाभ हो सकता है। लेकिन, इन तकनीकों के बारे में किसानों में जागरूकता की कमी है।
- डॉ. राजेश सिंह, उप कृषि निदेशक
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