परतावल। ग्राम छपिया में एक भूमिहीन दृष्टिबाधित महिला को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभार्थी बनाकर कूटरचित तरीके से जारी किस्त के 40,000 रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। खंड विकास अधिकारी की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ।
उन्होंने मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी को दोषी ठहराकर उसके निलंबन की संस्तुति भी की। मामले का खुलासा होने के बाद ग्राम प्रधान रुपये वापस करने को तैयार हो गया है। अब लोग सवाल पूछ रहे हैं कि भूमिहीन महिला को आवास योजना का लाभार्थी किस आधार पर बनाया गया? जिलाधिकारी के निर्देश पर पीड़िता को आवास निर्माण के लिए दो डिसमिल जमीन का पट्टा कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा छपिया निवासिनी साजरा खातून आंख से पूरी तरह से दिव्यांग हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना का पात्र पाए जाने पर उन्हें पहली और दूसरी किश्त के 1.10 लाख जारी कर दिए गए। आरोप है कि कूटरचित तरीके से ग्राम प्रधान और सचिव ने जारी किस्त में से 40,000 रुपये हड़प लिए। खंड विकास अधिकारी संतोष कुमार यादव ने अपनी जांच रिपोर्ट में ग्राम पंचायत अधिकारी को दोषी ठहराकर उनके निलंबन की संस्तुति करके जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र भी भेजा था। दिव्यांग महिला के पिता शमीम ने बताया कि आवास की पहली किश्त 40,000 रुपए आई तो सचिव और प्रधान ने उससे कहा कि तुम अपने खाते से पैसा निकाल कर ग्राम प्रधान को दे दो। वह तुम्हारा आवास बनवा देंगे। इस तरह बिना आवास का निर्माण शुरू कराए प्लिंथ लेबल का जियो टैग कर दिया गया।
खंड विकास अधिकारी ने बताया कि जांच में पाया गया कि लाभार्थी साजरा खातून भूमिहीन है। 25 सितंबर तक आवास बनवाने के लिए उसे भूमि भी आवंटित नहीं हो सकी है।साजरा खातून निहायत ही गरीब व शत-प्रतिशत दृष्टिहीन है। बिना भूमि के आवास आवंटित करवाकर सचिव का पहली और दूसरी किश्त जारी करा देना घोर अनियमितता है। इसके लिए सचिव आशीष सिंह दोषी हैं। मामले की जानकारी मिलने पर दिव्यांग और उसके पिता भूमि आवंटन के लिए उच्चाधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगाना शुरू कर दिए। सोमवार को तहसीलदार सदर पंकज शाही ने महिला को दो डिसमिल जमीन का पट्टा का प्रमाण पत्र सौंप दिया।