अधिक जुर्माना भी नहीं रोक सका विदेशी मटर की तस्करी
निचलौल। भारत-नेपाल बार्डर से विदेशी मटर की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए दो सौ रुपये प्रतिकिलो जुर्माना लगाने का नियम भी फेल होता दिखाई दे रहा है, क्योंकि केवल एसएसबी द्वारा विदेशी मटर की बरामदगी का आंकड़ा ही तस्करी रोकने का दावा करने वाले जिम्मेदारों की पोल खोल रहा है।
निचलौल कस्टम अधीक्षक आरके तिवारी ने कहा कि मिनिस्ट्री ऑफ कामर्स एंड एंडस्ट्री डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ फॉरेंस (विदेश व्यापार के महानिदेशक) एवं वाणिज्य मंत्रालय नई दिल्ली की तरफ से जारी अधिसूचना के आधार पर 24 सितंबर वर्ष 2020 को इंडो नेपाल बार्डर पर विदेशी मटर की तस्करी रोकने के लिए सभी तरह के मटर पर न्यूनतम आयात मूल्य दो सौ रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया था। उसके बाद से बरामद होने वाली विदेशी मटर पर दो सौ रुपये प्रति किलो की दर से जुर्माना लगना शुरू हो गया।
कार्यालय के रजिस्टर में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने बताया कि जुर्माना अधिक बढ़ने से शुरुआती कुछ दिनों तक बार्डर से विदेशी मटर की बरामदगी कम हुई थी, लेकिन बीते दो माह से विदेशी मटर की तस्करी बढ़ गई है। यही कारण है कि दिसंबर माह में 22वीं वाहिनी के झुलनीपुर, शितलापुर और पथलहवा बीओपी के एसएसबी ने 15 केस में 10 टन विदेशी मटर बरामद की। वहीं 22 जनवरी तक 11 मामलों से 14 टन विदेशी मटर बरामद किया गया है। क्षेत्र के कोमल यादव, सोनू गौंड़, अरविंद मिश्रा का कहना है कि अब ये आंकड़े साफ जाहिर कर रहे हैं कि जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते विदेशी मटर पर लगा अधिक जुर्माना भी तस्करी को नहीं रोक सका है।