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Maharajganj News: छह साल बाद भी महिला अस्पताल अधूरा, जिला अस्पताल के भरोसे गर्भवतियों का इलाज

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ओपीडी और सामान्य प्रसव तक सीमित व्यवस्था, महिला अस्पताल में नहीं पैथोलॉजी की सुविधा
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महिला अस्पताल में रोजाना पहुंचती हैं 200 मरीज, 10 से अधिक होते हैं प्रसव
महराजगंज। गर्भवती महिलाओं को एक ही छत के नीचे प्रसव पूर्व जांच से लेकर प्रसूता व नवजात को जांच-इलाज की सुविधा का संकल्प छह साल बाद भी अधूरा है। यहां पर खून-अल्ट्रासाउंड जांच से लेकर सिजेरियन तक के लिए गर्भवतियों को जिला अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
2020 से महिला अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। महिला अस्पताल में रोजाना 200 से अधिक महिलाएं ओपीडी में पहुंचती हैं और प्रतिदिन 10 से अधिक सामान्य प्रसव होते हैं। यहां ओपीडी, लेबर रूम, दवाओं और सामान्य प्रसव की सुविधा उपलब्ध है लेकिन सिजेरियन प्रसव, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी संबंधी जांच और नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है।
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गंभीर गर्भवती को सिजेरियन प्रसव की जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर ले जाना पड़ता है। दोनों अस्पतालों के बीच करीब 500 मीटर की दूरी है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को दूसरे अस्पताल ले जाने में परिजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड और रक्त जांच के लिए भी मरीजों को जिला अस्पताल जाना पड़ता है। जांच कराने के बाद उन्हें दोबारा महिला अस्पताल लौटना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह भागदौड़ परेशानी बढ़ाने वाली है।

एसएनसीयू के लिए नवजात को लाना पड़ता है जिला अस्पताल
महिला अस्पताल में पैदा लेने वाले नवजात को अगर हाइपोथर्मिया, पीलिया या हाइपोक्सिया समेत अन्य गंभीर बीमारी है तो उसे पीआईसीयू या एसएनसीयू के लिए जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। महिला अस्पताल में एसएनसीयू की सुविधा नहीं होने के कारण गंभीर नवजातों को जिला अस्पताल भेजा जाता है। इससे मां और बच्चे के उपचार की व्यवस्था अलग-अलग अस्पतालों में हो जाती है। महिला अस्पताल की एक मरीज ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सामान्य प्रसव की सुविधा यहां मिल जाती है लेकिन जांच या ऑपरेशन की जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। एक प्रसूता के परिजन ने बताया कि बच्चे को विशेष उपचार की जरूरत होने पर भी जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। उनका कहना है कि सभी जरूरी सुविधाएं महिला अस्पताल में ही उपलब्ध हों तो मरीजों को राहत मिलेगी।
स्पीक अप:
महिला अस्पताल में सभी आवश्यक सुविधाएं होनी चाहिए ताकि महिलाओं को जांच और उपचार के लिए जिला अस्पताल का चक्कर न लगाना पड़े। अस्पताल में सभी जरूरी जांच और उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए।
- अभिनव मिश्रा, चैनपुर घुघली

महिला अस्पताल शुरू होने पर लोगों को उम्मीद थी कि महिलाओं को गंभीर बीमारियों और प्रसव संबंधी समस्याओं का इलाज यहीं मिल सकेगा। छह साल बीत जाने के बाद भी जरूरी सुविधाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। महिलाओं को अब भी जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
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-अभिषेक सिंह उर्फ बबुना बाबू निवासी मेदनीपुर घुघली
वर्जन

महिला अस्पताल में ओपीडी, लेबर रूम, सामान्य प्रसव और दवाओं की सुविधा उपलब्ध है। स्टाफ की कमी और विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती के लिए पत्र भेजा गया है। तैनाती के बाद सभी सेवाएं गर्भवती महिलाओं, जच्चा-बच्चा को महिला अस्पताल में उपलब्ध हो सकेंगी।
- डॉ. एके द्विवेदी, सीएमएस जिला अस्पताल
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