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Maharajganj News: शिक्षा बना हथियार, सदस्यों का संवरा घर-द्वार

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस -लोकप्रियता में मिमी एसएचजी का ब्रांड को टक्कर, लोकल फॉर वोकल की जीवंत उदाहरण बनीं ज्योति
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महराजगंज। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने जिले की ग्रामीण क्षेत्र की आधी आबादी को चौका-चूल्हा से हटाकर उद्यमी श्रेणी में खड़ा करने का कार्य किया है। सदर एनआरएलएम से स्थानीय उत्पाद नामी कंपनियों के उत्पादों को टक्कर दे रहे हैं।
सदर ब्लॉक के एनआरएलएम की महिला सदस्य कुछ विशेष कर रही हैं। इसमें मिमी एसएचजी (सेल्फ हेल्प ग्रुप) आज पहचान की मोहताज नहीं। इनके समूह के उत्पाद आज नामी ब्रांडों को टक्कर दे रहे हैं। शिक्षा को हथियार बनाकर महज चार वर्षों में मिमी एसएचजी का डंका न सिर्फ जनपद में बल्कि राज्य स्तर पर बज रहा है। समूह अध्यक्ष के साथ 10 महिलाएं मिमी एसएचजी के तरक्की की साक्षी हैं जो प्रधानमंत्री के लोकल फार वोकल नारे की जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहीं।
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गोरखपुर पवित्रा महाविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण ज्योति की शादी 2017 में सदर विकास खंड के बागापार निवासी श्रवण निषाद संग हुई। सपने संजोए ज्योति ससुराल पहुंची तो कुछ ऐसा नहीं मिला जो उन्होंने शादी के बाद के लिए सोचा था। परिवार के पास जमीन के नाम पर तीन मंडी कृषि भूमि व जीर्णशीर्ण आवास था। पति जनरल मर्चेंट की दुकानों पर एक बेकर्स के यहां से दुकानों पर बेकरी आइटम पहुंचाते यही आय का स्रोत था। घर का खर्च मुश्किल से चलता। इसी बीच कोविड काल आया तो पति का रोजगार छिन गया। कोरोना का समय किसी तरह बीता तो ज्योति ने अपनी शिक्षा के आधार पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से संपर्क किया। ब्लॉक मिशन प्रबंधक अनिल विश्वकर्मा, शेषनाथ व मनोज मौर्य ने स्वयं सहायता समूह व कार्यों की जानकारी देकर एसएचजी गठन से लेकर तरक्की की राह दिखाई।
आज उस राह पर चलकर ज्योति अपने साथ 10 अन्य महिलाओं की तकदीर भी बदली है। 2025 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर इस तरक्की के लिए जिला प्रशासन की तरफ से तत्कालीन सीडीओ अनुराज जैन ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। आज इस समूह के उत्पाद सरकारी कार्यालयों से लेकर गांव-गांव तक मजबूत पैठ बना चुकी हैं।
2022 में पंजीकृत एसएचजी तैयार करता है स्वच्छता का उत्पाद
बीएमएम के मार्गदर्शन में ज्योति ने मिमी नाम से एसएचजी गठित कर गांव की 10 उन महिलाओं को जोड़ा जिनके पास थोड़ी बहुत जमा पूंजी व कुछ अलग करने का जज्बा था। समूह ने स्वच्छता उत्पाद लांच किया व बैंगलुरू से टॉयलेट क्लीनर, हैंडवाश, फिनायल व नहाने का साबुन बनाने की मशीन पांच लाख की लागत से मंगाई। इसमें दो लाख की जमा पूंजी सदस्यों की तो बाकी एनआरएलएम ने ऋण के तौर पर उपलब्ध कराया।
उत्पादन व बिक्री के लिए प्रशिक्षण एक सप्ताह तक सदर ब्लॉक में मिला। मिमी के टॉयलेट क्लीनर, फिनायल, हैंडवाश का सबसे बढ़ा खरीदार पंचायती राज विभाग है जो ग्राम पंचायतों के एकल व सार्वजनिक शौचालय की सफाई के लिए जेम पोर्टल से करता है। प्रति माह एक लाख रुपये सिर्फ सरकारी स्तर से खरीदारी हो जाती है।
पति के सहयोग से बाजार में पकड़
मिमी एसएचजी के तरक्की अभियान में 2025 में ज्योति के पति श्रवण निषाद भी जुड़े और उन्होंने समूह के उत्पाद को अपनी कंपनी मराछी इंडस्ट्रीज के जरिये आसपास के जनपदों तक ही नहीं बल्कि सूबे के हर जनपद तक पहुंचाया। ब्रांडेड से मूल्य का कम होना बिक्री में इजाफे का कारण बना। ज्योति कहती हैं कि यह सफलता सबके मेहनत का परिणाम इसलिए सफलता के सभी सहभागी हैं।
825 एसएचजी पंजीकृत
सदर एनआरएलएम का दायित्व देखने वाले एडीओ आईएसबी नगेंद्र देव पांडेय ने बताया कि सदर ब्लॉक एनआरएलएम में कुल 825 एसएचजी पंजीकृत हैं। व्यवसाय चयन के आधार पर प्रशिक्षण व डेढ़ से दो लाख रुपये तक लोन व 50 हजार का अनुदान गठन के छह माह बाद दिया जाता है। बैंक ऋण दिलाने में भी सहयोग दिया जाता है।
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वर्जन
सदर विकास खंड के बागापर में मिमी एसएचजी की महिलाएं अध्यक्ष ज्योति की अगुवाई में सफलता के प्रतिमान गढ़ रही हैं। उनके उत्पाद की प्रति माह बिक्री चार लाख रुपये से अधिक है। हर सदस्य 15 से 20 हजार मासिक आय अर्जित कर रहीं। एनआरएलएम से हर प्रकार का सहयोग जैसे प्रशिक्षण, ऋण उपलब्धता, बिक्री सहयोग जैसी सहूलियत समय-समय पर दी जाती है।
-मो. जाकिर, उपायुक्त, एनआरएलएम, महराजगंज
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