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पपीते और केले की फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट

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पपीते और केले की फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट
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निचलौल। मूसलाधार बारिश के कारण खेतों में जलभराव होने से पपीता एवं केले की खेती बर्बाद हो गई है। खेत में लगी पूंजी डूब गई है। जलभराव को कम करने के लिए पंपिंगसेट से पानी एक तरफ से किसान निकालते हैं, तो दूसरी ओर बारिश होने पर फिर खेत में पानी भर जा रहा है।
क्षेत्र के लेदी रामचंद्रही गांव के किसान कुलदीप द्विवेदी ने बताया कि आठ एकड़ में पपीते और 10 एकड़ में केले की फसल लगी है। बारिश होने से खेतों में जलभराव हो गया है। जिसके चलते फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे महीनों की मेहनत के साथ लाखों रुपयों की लागत भी व्यर्थ चली गई। भारत नेपाल बॉर्डर से सटी अधिकांश जगहों पर यही हाल है।
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बारिश से गन्ने और धान को भी खासा नुकसान हुआ है। इन्होंने कहा कि मूसलाधार बारिश होने के साथ खेतों से जल निकासी नहीं हो पाई। जिससे फसल खराब हो गई है। इससे किसानों को काफी घाटा हुआ है। किसान मिथलेश दुबे ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों ने अपनी आय बढ़ाने के लिए पपीते और केले की खेती शुरू की। लेकिन मौसम की बेरुखी ने फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
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फायदे का सौदा है केले और पपीते की खेती
किसान कुलदीप द्विवेदी ने कहा कि केले और पपीते की खेती से फायदा होता है। केले की फसल में लागत प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये तक आती है। बेचने पर एक एकड़ में तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक में बिक जाती है। एक साल में डेढ़ से दो लाख रुपये तक का मुनाफा हो जाता है। वही पपीते फसल की लागत प्रति एकड़ 80 हजार से एक लाख रुपये तक आती है। बेचने पर एक एकड़ की पैदावार से ढाई से तीन लाख रुपये तक में बिक जाती है। पौध लगाने के छह माह बाद पपीता फल देना शुरू कर देता है। इस बार काफी नुकसान हुआ है।
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