महराजगंज। सोमवार को अयोध्या में भगवान श्रीराम के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद हर तरफ उत्सव का माहौल है। सभी का सपना साकार हुआ। नए स्वर्णिम युग की शुरुआत हुई है। गुजरे वक्त की अयोध्या और अब में जमीन आसमान का अंतर है। आज की तस्वीर अलौकिक है। पहले दर्शन के बाद कोई रूकना नहीं चाहता था। अब तो वहां से आने का मन नहीं करता है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद लोगों ने गुजरे वक्त की अयोध्या व अब में अंतर पर बात की गई तो सभी ने अपनी प्रक्रिया व्यक्त की।
समाजसेवी विजय सिंह संत कहते हैं कि करीब पांच सौ वर्ष पूर्व जिस अयोध्या कांड का ‘अथ’ हुआ था, उसकी परमात्मा राम के दिव्य-भव्य भवन में स्वर्गिक आभा की संगति में विराजमान होने के साथ ‘इति’ हुई। वर्षों से जिस दिन का इंतजार था, वह एक पूरा हो गया।
जितेंद्र शुक्ल ने कहा कि पहले प्रभु श्रीराम 14 वर्ष वनवास काटे फिर पांच सौ साल टेंट में बिताए। नई अयोध्या भगवान श्रीराम की अयोध्या है। सनातन धर्म की विजय हुई है। अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होना किसी बड़े सपने के साकार होने से कम नहीं है। अब अयोध्या बदल गई है।
शिक्षाविद् आदित्य श्यामदेव ने कहा कि शबरी की भांति प्रतीक्षारत साधु-संत, माता जानकी की भांति सहनशील भारतीय समाज और हनुमान जी जैसे सच्चे रामभक्तों की चिर अभिलाषा भी पूरी हो गई। अब तो हर बार अयोध्या जाने का मन करेगा। पहले तो वहां श्रद्धालुओं के लिए कोई सुविधा नहीं थी।
शिक्षाविद धर्मेंद्र यादव ने बताया कि जो अयोध्या कभी अपनी पहचान बताने के लिए सिसकियां ले रहीं थी। उस अयोध्या को विश्व के पटल पर आज पहचान मिल गई। जिसे अनेक आघात सहने पड़े। जिसने उपेक्षा का दंश झेला। जिसे अपना सत्य प्रमाणित करने में पांच सदियां लग गईं। वह अयोध्या आज इतिहास में अमर हो गई।