महराजगंज। होली पर्व को लेकर रंग-गुलाल के साथ मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स का बाजार सज गए है। लोग अपने चहेतों को गिफ्ट देने और घर के लिए जमकर खरीदारी कर रहे हैं। मांग को देखते हुए कुछ दुकानदार बाहर से भी मिठाइयां मंगवा रहे हैं। ग्राहकों को लुभाने के लिए बाजारों में कई तरह की आकर्षक मिठाइयां सजी हैं। कई तरह के रंगों से सजी और चांदी के वर्क लगी मिठाइयां बाजारों में पहुंच रही हैं। शहर में तो कम लेकिन इस तरह की मिठाइयां गांव-देहात में ज्यादा मिल रही हैं। अगर खरीदते समय सतर्कता नहीं बरते तो आप बीमार हो सकते हैं। मिलावट को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग अलर्ट है।
चांदी के वर्क वाली मिठाइयां लोगों को आकर्षित कर रही हैं। यही कारण है कि ज्यादातर मिठाइयों को चांदी के वर्क से सजाकर रखा जाता है। सिल्वर फायल या चांदी का वर्क आयुर्वेदिक मेडिसिन का सदियों पुराना हिस्सा रहा है और खाने की सामग्रियों को सजाने के लिए इसका इस्तेमाल होता रहा है। यह वर्क हमेशा चांदी ही नहीं होता, बल्कि आजकल सिल्वर जैसे दिखने वाले कई टाक्सिक मेटल भी बाजार में आ गए हैं।
मिठाइयों के साथ-साथ कई दूसरी चीजें सजाने में इन टाक्सिक मेटल का इस्तेमाल हो रहा है। मिठाइयों और खाने की चीजों को सजाने के लिए जिन सिल्वर लीफ का इस्तेमाल होता है। उनमें अक्सर सिल्वर के नाम पर एल्यूमीनियम व कई तरह के नुकसानदायक तत्वों का इस्तेमाल होता है, जो सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक हैं।
जानकार बताते हैं कि असली सिल्वर वर्क बेहद पतला और महंगा होता है। इसकी कीमत अधिक होने के कारण धंधेबाज एल्युमिनियम की शीट को मिठाइयों पर चिपका देते हैं। देखने में यह चांदी जैसा ही चमकदार दिखता है, जिससे आम ग्राहक आसानी से धोखा खा जाता है।
वहीं क्रीम की जगह कई जगह फ्रोजन व व्हिपिंग पाउडर आधारित बनावटी क्रीम का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें कृत्रिम रंग व फ्लेवर मिलाए जाते हैं। ये दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदेह हैं।
काजू बर्फी पर सबसे अधिक एल्युमिनियम वर्क का प्रयोग हो रहा है। गुलाब जामुन और छेना से बनी कुछ मिठाइयों पर भी इस तरह के वर्क का इस्तेमाल करते हैं। ठेलों पर बिकने वाली मिठाइयों पर भी इसका प्रयोग होता है।